08
Jul
'भाई छातु' बंगाल की एक बेहद दुर्लभ और धीरे-धीरे लुप्त हो रही पारंपरिक रस्म है, जिसे आज भी कुछ 'बांगाल' परिवारों द्वारा चैत्र संक्रांति के अवसर पर बेहद श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भाई दूज की ही तरह यह त्योहार भी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और भाई की लंबी उम्र की कामना को समर्पित है। इस दिन बहनें सुबह जल्दी उठकर उपवास रखती हैं और अपने भाई के माथे पर चन्दन, दही और धान-दूर्वा (घास) से तिलक लगाकर उनके सुखी और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना करती हैं। इस अनूठी रस्म की सबसे बड़ी खासियत इसके नाम में छिपा 'छातु'…
