पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का बढ़ता संकट सत्ता परिवर्तन के बाद ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां पार्षदों के इस्तीफे और बुलडोजर कार्रवाई शुरू

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार के सत्ता संभालने के मात्र तीन हफ्तों के भीतर तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चौतरफा प्रशासनिक और राजनीतिक कार्रवाई तेज हो गई है। कोलकाता से २६ मई २०२६ को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में १५ साल पुराने तृणमूल शासन के खत्म होने के बाद अब स्थानीय नगर निकायों और पंचायतों में पार्टी का संकट गहरा गया है। नए प्रशासन द्वारा सरकारी जमीनों पर बने अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़े पैमाने पर बुलडोजर अभियान चलाया जा रहा है। हुगली जिले के कोननगर में तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय कार्यालय को ढहा दिया गया है, जो कथित तौर पर सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था। इसके अलावा कोलकाता के बेलेघाटा, बोसपुकुर, तिलजला और कस्बा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वर्तमान व पूर्व तृणमूल नेताओं तथा उनके करीबी दबंगों से जुड़ी बहुमंजिला इमारतों पर बुलडोजर चलाए गए हैं। यहाँ तक कि कस्बा के विधायक जावेद खान की एक इमारत को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर विध्वंस की चेतावनी दी गई है, जबकि कोलकाता नगर निगम ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से जुड़ी कुछ संपत्तियों को स्वीकृत योजनाओं में विचलन को लेकर स्पष्टीकरण नोटिस भेजे हैं।

इस प्रशासनिक दबाव के बीच तृणमूल कांग्रेस को बड़े पैमाने पर सांगठनिक बिखराव और आंतरिक बगावत का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में पार्टी के जमीनी नेताओं, पंचायत प्रधानों और पार्षदों की गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है, जिसमें बीरभूम और वर्धमान से जबरन वसूली व डराने-धमकाने के आरोपों में प्रमुख नेताओं की धरपकड़ की गई है। इस कार्रवाई के खौफ और हार की नैतिक जिम्मेदारी के चलते राज्यभर की नगरपालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे शुरू हो गए हैं। अकेले भाटपारा नगरपालिका में अध्यक्ष सहित कम से कम ३० पार्षदों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है, जबकि डायमंड हार्बर नगरपालिका के १६ में से ८ तृणमूल पार्षदों ने पद छोड़ दिया है। इसी तरह की सामूहिक इस्तीफों की खबरें हालिसहर, कांथी, उत्तर बैरकपुर और गारुलिया नगरपालिकाओं से भी आ रही हैं। इस बीच, वरिष्ठ तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी की आचरण और चुनावी रणनीति बनाने वाली एजेंसी आई-पैक की भूमिका पर तीखे सवाल उठाते हुए बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। यद्यपि तृणमूल सुप्रीमो ने इस बुलडोजर राजनीति और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की सार्वजनिक रूप से कड़ी आलोचना की है, लेकिन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस अभूतपूर्व संकट पर काफी हद तक खामोश नजर आ रहा है।

By rohan