राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा कदम भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को सौंपी १४२.८ एकड़ भूमि

पश्चिम बंगाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को १४२.७९ एकड़ भूमि आधिकारिक रूप से सौंप दी है। कोलकाता से २८ मई २०२६ को जारी इस रणनीतिक रिपोर्ट के अनुसार, इस जमीन का मुख्य उपयोग भारत-बांग्लादेश सीमा पर नई सीमा चौकियां स्थापित करने और कंटीले तारों की बाड़ लगाने के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर इस महत्वपूर्ण प्रगति को साझा करते हुए बताया कि यह कदम राज्य सरकार द्वारा ११ मई को अपनी पहली कैबिनेट बैठक में लिए गए उस बड़े नीतिगत फैसले का हिस्सा है, जिसके तहत सीमा सुरक्षा अवसंरचना परियोजनाओं के लिए ४५ दिनों के भीतर कुल ६०० एकड़ भूमि हस्तांतरित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसी कड़ी के पहले चरण के तहत २० मई को भी पाँच जिलों की ४३ एकड़ खरीदी गई जमीन और ३१.९ एकड़ निहित सरकारी भूमि के स्वीकृति आदेश बीएसएफ को सौंपे जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए जिला-वार आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह जमीन राज्य के ९ सीमावर्ती जिलों में वितरित की गई है, जिसमें कूचबिहार में २२.९२ एकड़, जलपाईगुड़ी में ३५.१६ एकड़, दार्जिलिंग में ८.८१ एकड़, उत्तर दिनाजपुर में २.८४ एकड़ और दक्षिण दिनाजपुर में २०.१७ एकड़ भूमि शामिल है। इसके अलावा मालदा में १०.९ एकड़, मुर्शिदाबाद में ३८.८ एकड़, नदिया में ०.५५ एकड़ और उत्तर २४ परगना में २.६ एकड़ जमीन सुरक्षा बल के नियंत्रण में दी गई है। पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ २,२१७ किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जो देश के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे लंबी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस विशाल सीमा का लगभग १,६०० किलोमीटर हिस्सा पहले ही बाड़ से सुरक्षित किया जा चुका है, जबकि लगभग ६०० किलोमीटर का क्षेत्र अभी भी बिना बाड़ के खुला हुआ है। सरकार की इस नई और त्वरित दोतरफा रणनीति का मुख्य उद्देश्य सीमा पर बाड़ लगाने के काम में तेजी लाने के साथ-साथ घुसपैठ और अवैध प्रवासियों के खिलाफ प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह सख्त बनाना है।

By rohan