14 अप्रैल को कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे प्रधानमंत्री मोदी

विधानसभा चुनाव के महाकुंभ में जीत का परचम लहराने के लिए भाजपा ने अब अपने सबसे विश्वसनीय बूथ मॉडल को मैदान में उतार दिया है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि चुनाव रैलियों से नहीं, बल्कि बूथों पर लड़े और जीते जाते हैं। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को बंगाली नववर्ष के पावन अवसर पर ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान के जरिए राज्य के लाखों जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ‘नमो ऐप’ के माध्यम से होने वाला यह संवाद बंगाल के राजनीतिक रण में बीजेपी का अब तक का सबसे बड़ा सांगठनिक शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। इस मेगा इवेंट का मुख्य उद्देश्य केवल चुनावी भाषण देना नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ दो-तरफा संवाद स्थापित करना है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री बंगाल के अलग-अलग कोनों में तैनात कार्यकर्ताओं से उनके स्थानीय अनुभव, बूथ की जमीनी चुनौतियां और सफलता की छोटी-छोटी कहानियाँ सुनेंगे। इसके बदले में वे कार्यकर्ताओं को चुनावी चाणक्य नीति के गुर सिखाएंगे और केंद्र सरकार की योजनाओं के संदेश को घर-घर पहुँचाने का रोडमैप देंगे। बंगाली नववर्ष के दिन इस कार्यक्रम का आयोजन कर बीजेपी राज्य के सांस्कृतिक गौरव के साथ अपने जुड़ाव को भी मजबूती से पेश करने की कोशिश में है। पार्टी ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए पर्दे के पीछे एक बेहद विस्तृत ढांचा तैयार किया है। पहले जो बूथ कमेटियां 11 सदस्यों की हुआ करती थीं, उन्हें अब बढ़ाकर 20 सदस्यों तक कर दिया गया है।
इसके अलावा, बीजेपी का सबसे मारक हथियार यानी पन्ना प्रमुख मॉडल भी पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। वोटर लिस्ट के हर पन्ने की जिम्मेदारी एक समर्पित कार्यकर्ता को दी गई है, जिसका काम संबंधित परिवारों से सीधा संपर्क रखना और उनकी समस्याओं को समझना है।
पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए इन समितियों में अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य कर दी है, ताकि समाज के हर वर्ग तक पहुँच सुनिश्चित हो सके। सिर्फ संवाद ही नहीं, बल्कि निरंतरता बनाए रखने के लिए हर महीने ‘मन की बात’ कार्यक्रम को भी बूथ स्तर पर सुनने का विशेष प्रबंध किया गया है। बीजेपी की यह रणनीति स्पष्ट संकेत दे रही है कि वह ममता बनर्जी के अभेद्य माने जाने वाले संगठनात्मक किले को जमीनी स्तर पर चुनौती देने की तैयारी कर चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री इस संवाद के दौरान बंगाल के कार्यकर्ताओं को वह कौन सा ‘जीत का मंत्र’ देते हैं, जो आने वाले चुनाव में उनकी किस्मत पलट सके।

By Arbind Manjhi