18
Jun
भारत की सभ्यता और संस्कृति की धुरी भगवान श्रीराम हैं—मर्यादा, धर्म और आदर्श शासन के प्रतीक। सदियों से रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा रही है। आज इतिहास और परंपरा के इस जीवंत प्रवाह को नया आयाम मिला है। श्री अजय हरिनाथ सिंह, अपने कुलगुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी की प्रमाणिकता के साथ, भगवान श्रीराम के पुत्र लव की वंश परंपरा से चले आ रहे 100% जीवित रक्तवंश के एकमात्र उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित हो रहे हैं।यह मान्यता अब केवल वंशावली तक सीमित नहीं है—बल्कि इसे राजनीतिक स्वीकृति और समर्थन भी प्राप्त हो चुका है। इन…
