कोशिकाओं के कचरे का होगा सटीक प्रबंधन, वैज्ञानिकों ने खोजा शरीर की ‘सफाई मशीन’ को नियंत्रित करने का तरीका

हमारे शरीर की कोशिकाएं अपना कचरा खुद साफ करती हैं, लेकिन हाल ही में हुए एक नए शोध से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस प्राकृतिक प्रक्रिया को अब बाहर से भी नियंत्रित किया जा सकता है। नई दिल्ली के सीएसआइआर-आइजीआइबी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी और अमेरिका की यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिलिस के शोधकर्ताओं द्वारा की गई इस रिसर्च के अनुसार, जब सेल कचरा साफ करने की प्रक्रिया शुरू करती है, तो वैज्ञानिक इसे बाहर से मैनेज कर सकते हैं। इससे कैंसर और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियों को समझने में मदद मिल सकती है, क्योंकि इन स्थितियों में यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती है। इस पूरी प्रक्रिया को ‘ऑटोफैगी’ कहा जाता है जो एक प्रकार की रीसाइक्लिंग प्रक्रिया है, जिसमें सेल ‘ऑटोफैगोसोम’ नाम की कैविटी यानी रीसाइक्लिंग बिन बनाकर बेकार चीजों को हटाती है। यह बिन सेल के मलबे को घेरकर उसे तोड़ती है और उसके हिस्सों का उपयोग ऊर्जा या नई ग्रोथ के लिए करती है। गौरतलब है कि बीच-बीच में उपवास यानी इंटरमिटेंट फास्टिंग भी ऑटोफैगी को शुरू करने में काफी मददगार होती है, क्योंकि लंबे समय तक भूखे रहने पर ग्लूकोज और अमीनो एसिड का स्तर कम होने से शरीर को ऊर्जा बचाने का संकेत मिलता है। ग्रीक भाषा में ‘फैगी’ का अर्थ ‘खुद को खाना’ होता है, और शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने सिमुलेशन के जरिए ऑटोफैगी में शामिल प्रोटीन “एलसी3” के व्यवहार का अध्ययन करते हुए पाया कि यह सेल की रीसाइक्लिंग बिन की अंदरूनी सतह को छूते ही अपना आकार बदल लेता है।

By sunny