इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरना कई लोगों के लिए मुश्किल काम साबित होता है. इसी को आसान बनाने के लिए Paytm ने टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म ClearTax के साथ साझेदारी की है. इस नई सुविधा के तहत यूजर्स Paytm ऐप के जरिए केवल 11 रुपये की शुरुआती फीस देकर अपना ITR फाइल कर सकते हैं. हालांकि, टैक्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिटर्न सबमिट करने से पहले सभी जानकारियों की अच्छी तरह जांच जरूर कर लें.
Paytm ऐप पर मिलेगी ITR फाइलिंग की सुविधा
Paytm ऐप के माध्यम से यूजर्स ClearTax की मदद से ITR दाखिल कर सकेंगे. कंपनी के मुताबिक, इनकम टैक्स विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर कई जरूरी जानकारियां पहले से ही ऑटो-फिल हो जाएंगी. इसके अलावा सिस्टम आपके लिए उपयुक्त ITR फॉर्म और सही टैक्स रिजीम का सुझाव भी देगा.
अगर आपने शेयर बाजार में निवेश किया है, तो यह सुविधा 80 से अधिक स्टॉक ब्रोकर्स से ट्रेडिंग डेटा एक क्लिक में इंपोर्ट करने का विकल्प देती है. इससे कैपिटल गेन की गणना अपने आप हो जाती है और मैन्युअल एंट्री की जरूरत काफी कम हो जाती है.
कंपनी का कहना है कि उसका AI सिस्टम अलग-अलग ब्रोकर्स के विभिन्न स्टेटमेंट फॉर्मेट को समझने में सक्षम है, जिससे डेटा इंपोर्ट करने की प्रक्रिया और आसान हो जाती है.
टैक्स नोटिस मिलने पर भी मिलेगी मदद
Paytm की इस सर्विस की खास बात यह है कि ITR फाइल करने के बाद यदि इनकम टैक्स विभाग की ओर से कोई नोटिस आता है, तो ClearTax उसे समझने, उसका जवाब तैयार करने और पूरी प्रक्रिया में सहायता देने का दावा करता है. यह सुविधा 11 रुपये वाले शुरुआती प्लान में भी शामिल है. यूजर्स इस सर्विस को Paytm ऐप के Free Tools सेक्शन में एक्सेस कर सकते हैं.
किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?
यह सुविधा खास तौर पर उन सैलरीड कर्मचारियों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनकी आय मुख्य रूप से Form 16, बैंक ब्याज और सामान्य निवेश तक सीमित है. पहले से भरी गई जानकारी और ऑटोमेटिक डेटा इंपोर्ट की मदद से समय की बचत होती है और छोटी-मोटी गलतियों की संभावना भी कम हो जाती है.
ITR सबमिट करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
रिटर्न फाइल करने के बाद फाइनल सबमिट बटन दबाने से पहले अपनी सभी जानकारियों की अच्छी तरह जांच कर लें. इसमें आय के सभी स्रोत, बैंक ब्याज, निवेश, कैपिटल गेन, टैक्स क्रेडिट और डिडक्शन जैसी जानकारी शामिल होनी चाहिए. यदि आपकी आय कई स्रोतों से आती है, तो रिटर्न की दोबारा समीक्षा करना और भी जरूरी हो जाता है.
हालांकि सिस्टम आपके लिए टैक्स रिजीम का सुझाव दे सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वही विकल्प आपके लिए सबसे लाभदायक हो. इसलिए पुरानी और नई टैक्स रिजीम की तुलना जरूर करें और देखें कि किस व्यवस्था में आपकी टैक्स देनदारी कम बनती है.
