इंश्योरेंस अवेयरनेस कमेटी लाइफ इंश्योरेंस द्वारा इरडा (आईआरडीएआई) की वार्षिक रिपोर्ट दो हजार चौबीस पच्चीस के किए गए विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण डेटा सामने आया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष दो हजार चौबीस पच्चीस में भारत के जीवन बीमा उद्योग द्वारा अंडररिटेन किए गए कुल प्रीमियम में रिन्यूअल प्रीमियम का योगदान पचपन बिंदु शून्य नौ प्रतिशत रहा है। यह आंकड़ा बीमा धारकों की निरंतर प्रतिबद्धता और ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक संबंधों की मजबूत प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित करता है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान पूरे बीमा उद्योग ने कुल आठ लाख छियासी हजार करोड़ रुपये की प्रीमियम आय दर्ज की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में छह बिंदु सात तीन प्रतिशत की ठोस वृद्धि को दर्शाती है। रिन्यूअल प्रीमियम का यह मजबूत योगदान यह साफ करता है कि किस प्रकार दीर्घकालिक जीवन बीमा उत्पाद आर्थिक चक्रों के उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों को वित्तीय सुरक्षा, अनुशासित बचत और सेवानिवृत्ति यानी रिटायरमेंट की योजना बनाने में निरंतर मदद कर रहे हैं।
इस वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, बीमा उद्योग ने समीक्षाधीन वर्ष के दौरान कुल छह लाख तीस हजार करोड़ रुपये के दावों और लाभों का भुगतान किया है, जो कुल एकत्रित नेट प्रीमियम के लगभग बहत्तर प्रतिशत के बराबर है। यह विशाल भुगतान नीतिधारकों और उनके लाभार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता प्रदान करने में इस पूरे क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका को मजबूती से रेखांकित करता है। दावों के निपटान के मामले में व्यक्तिगत मृत्यु दावा निपटान अनुपात यानी इंडिविजुअल डेथ क्लेम सेटलमेंट रेशियो संतानवे बिंदु बयासी प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि ग्रुप क्लेम सेटलमेंट रेशियो निन्यानवे बिंदु द्विआसठ प्रतिशत के बेहद उच्च स्तर पर रहा, जो ग्राहक सेवा और क्लेम सपोर्ट के प्रति कंपनियों के फोकस को दिखाता है। इस उपलब्धि पर अपनी बात रखते हुए इंश्योरेंस अवेयरनेस कमेटी लाइफ इंश्योरेंस के अध्यक्ष कमलेश राव ने कहा कि रिन्यूअल प्रीमियम की यह मजबूत हिस्सेदारी वित्तीय सुरक्षा, अनुशासित बचत और रिटायरमेंट की तैयारियों के प्रति ग्राहकों के निरंतर जुड़ाव को साबित करती है, और यह दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा व निरंतरता बनाए रखने के महत्व के बारे में बढ़ती जागरूकता का एक बड़ा प्रमाण है।
