राज्य सरकार द्वारा आशा कार्यकर्ताओं (ASHA Workers) और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के मानदेय में की गई वृद्धि के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के भीतर ही भेदभाव के आरोप उठने लगे हैं। अपनी विभिन्न मांगों और मानदेय वृद्धि से वंचित किए जाने के विरोध में मंगलवार को नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन (NUHM) के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों ने सिलीगुड़ी महकुमा परिषद में एक विरोध प्रदर्शन किया और डेपुटेशन (ज्ञापन) सौंपा। आंदोलनकारियों ने मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (CMOH) के माध्यम से राज्य की मुख्यमंत्री को संबोधित यह मांग पत्र भेजा।
इस आंदोलन और स्वास्थ्य कर्मियों की नाराजगी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. बजट में अनदेखी से फूटा गुस्सा
आंदोलनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि हाल ही में पेश किए गए राज्य बजट में आशा कार्यकर्ताओं सहित कई अन्य श्रेणियों के स्वास्थ्य कर्मियों का मानदेय (भत्ता) बढ़ाने की घोषणा की गई थी, लेकिन NUHM के तहत दिन-रात काम करने वाले कर्मचारियों के लिए किसी भी वित्तीय लाभ या वेतन वृद्धि का जिक्र नहीं किया गया। सरकार के इस कदम से वे खुद को ठगा हुआ और अत्यंत उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
2. “सिर्फ आशा कार्यकर्ता ही नहीं संभालतीं पूरा सिस्टम”
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि अक्सर यह मान लिया जाता है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का सारा जिम्मा सिर्फ आशा कार्यकर्ताओं के कंधों पर है, जो कि पूरी तरह सच नहीं है। उन्होंने कहा कि:
गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच और उनकी देखभाल।
दवाओं का उचित वितरण और प्रबंधन।
लैब से जुड़े जरूरी परीक्षण (पैथोलॉजी कार्य)।
प्राथमिक चिकित्सा और ओपीडी सेवाओं का सुचारू संचालन। ये सभी महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाले काम NUHM के कर्मचारी ही संभालते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके योगदान को प्रशासन की ओर से कोई उचित पहचान या वित्तीय प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।
3. डॉक्टरों और फार्मासिस्टों का मिला साथ, राज्यव्यापी ‘पेन डाउन’
सिलीगुड़ी में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में केवल जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कर्मी ही नहीं, बल्कि कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, जेएनएम (JNM) स्टाफ, फार्मासिस्ट और डॉक्टर्स भी शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने बताया कि यह केवल सिलीगुड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसी मांग को लेकर आज पूरे पश्चिम बंगाल में ‘पेन डाउन’ (काम बंद) आंदोलन चलाया जा रहा है, जिससे शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
4. मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकेले सिलीगुड़ी क्षेत्र में NUHM की कुल 10 इकाइयां (Units) सक्रिय हैं, जिनसे जुड़े लगभग 40 से 50 स्वास्थ्य कर्मी आज सीधे तौर पर इस आंदोलन में शामिल हुए। कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द ही मानदेय वृद्धि की घोषणा नहीं की, तो आने वाले दिनों में वे इस आंदोलन को और अधिक उग्र तथा व्यापक रूप देने के लिए मजबूर होंगे।
