18
Mar
जलपाईगुड़ी में चरक पूजा के तैयारी शुरू हो गई है। बंगाली नववर्ष से एक दिन पहले चैत्र संक्रांति को चरक पूजा आयोजित की जाती है। जो मूलतः शिव गजानन उत्सव का हिस्सा है। चरक पूजा चैत्र संक्रांति अर्थात चैत्र माह के अंतिम दिन मनाई जाती है। इस पूजा को नील पूजा भी कहा जाता है। पूजा से एक दिन पहले चरक वृक्ष को धोकर साफ किया जाता है। इसमें शिवलिंग या शिदुर (शिव का प्रतीक) को पानी से भरे बर्तन में रखकर लकड़ी का एक लंबा तख्ता रखा जाता है। इसे श्रद्धालु बूढ़ा शिव कहते हैं। इस पूजा से पहले भक्त घर-घर जाकर…
