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Aug
इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR भरते समय जल्दबाजी में कई बार टैक्सपेयर्स गलत फॉर्म चुन लेते हैं। खासकर 31 जुलाई की डेडलाइन के आसपास जल्दबाजी में ITR-1 या ITR-2 फाइल करने के बाद पता चलता है कि उनकी दूसरी तरह की इनकम भी थी, जैसे इंट्राडे ट्रेडिंग, F&O में नुकसान या फ्रीलांसिंग से हुई कमाई। ऐसे मामलों में ITR-3 या ITR-4 की जरूरत पड़ सकती है। अब नॉन-ऑडिट बिजनेस और प्रोफेशनल टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त की डेडलाइन नजदीक है। ऐसे में सवाल उठता है कि गलत फॉर्म की गलती अभी सुधारी जाए या बाद में रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल किया…
