एडवर्टाइजिंग स्टाण्डर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) ने अपनी सालाना शिकायत रिपोर्ट 2025-2026 जारी की है। तमाम सरकारी रोक-टोक के बावजूद, विदेशों से चलने वाली सट्टेबाजी (ऑफशोर बेटिंग) से जुड़े विज्ञापन नियमों को तोड़ने में सबसे आगे रहे, जिनके खिलाफ सबसे ज़्यादा 6,933 मामले सामने आए। इसके बाद रियल एस्टेट (643 मामले), पर्सनल केयर यानी ब्यूटी प्रोडक्ट्स (576 मामले), खाने-पीने की चीजें (331 मामले) और ‘ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट’ का उल्लंघन करने वाली दवाइयां या जादुई इलाज के दावे (274 मामले) रहे।
एएससीआई ने साल 2025-26 में कुल 11,581 मामलों की जांच की, जो पिछले साल के मुकाबले 21% ज़्यादा है। ये मामले 9,841 विज्ञापनों से जुड़े थे, जिनकी संख्या में पिछले साल की तुलना में 37% की बढ़ोतरी हुई है। जांच किए गए विज्ञापनों में से 98% ऐसे निकले जिनमें बदलाव करने की ज़रूरत थी। खास बात यह है कि इनमें से 93% मामले खुद एएससीआई ने अपनी सक्रिय निगरानी के ज़रिए पकड़े।
गलत या भ्रामक विज्ञापनों के मामले में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स यानी इंटरनेट सबसे आगे रहे, जहाँ कुल पकड़े गए विज्ञापनों का 97.3% हिस्सा देखा गया। इनमें से भी 82% विज्ञापन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पैसे देकर दिखाए गए यानी प्रायोजित थे। इंटरनेट पर होने वाले इन नियमों के उल्लंघनों में से अकेले 79.84% मामले मेटा (जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम) प्लेटफॉर्म्स पर पाए गए।
यह रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तेज़ रफ़्तार और पहुंच का इस्तेमाल गुमराह करने वाले और नुकसानदेह विज्ञापनों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। कुल उल्लंघनों में से, नुकसानदेह प्रोडक्ट्स या स्थितियों को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन 75.4% मामलों के लिए ज़िम्मेदार थे, जबकि भ्रामक दावों वाले विज्ञापन 27.5% रहे। ये आंकड़े बताते हैं कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा का जोखिम अब सिर्फ़ गलत जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कानूनन प्रतिबंधित चीज़ों को बढ़ावा देना भी शामिल हो चुका है।
यह बात खासतौर पर विदेशों से चलने वाली सट्टेबाजी पर लागू होती है, जहाँ बहुत तेज़ी से नया कंटेंट और विज्ञापन बनाए जाते हैं और उन्हें अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर फैलाया जाता है। ये विज्ञापन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, संबधित नेटवर्क्स, सोशल मीडिया ग्रुप्स और मैसेजिंग ऐप्स के ज़रिए धड़ल्ले से बांटे जा रहे हैं, जिससे इन्हें पहचानना और इन पर निगरानी रखना और भी मुश्किल हो जाता है। अप्रैल और दिसंबर 2025 के बीच, इन्फ्लुएंसर्स द्वारा नियमों के उल्लंघन के 854 मामले सामने आए, जिनमें कुछ अकाउंट्स तो पूरी तरह से सट्टेबाजी के कंटेंट के लिए ही बने थे।
