प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक आवास लोक कल्याण मार्ग पर एनडीए के नव शामिल सांसदों के साथ एक बेहद अनूठी और विशेष नाश्ता बैठक की। इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री नितिन नवीन सहित एनडीए के कई शीर्ष नेता मौजूद रहे। हाल ही में तृणमूल का दामन छोड़कर नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए 19 सांसदों सहित करीब 45 जनप्रतिनिधियों ने इस संवाद में हिस्सा लिया। तृणमूल छोड़कर आए प्रमुख चेहरों में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकली घोष दस्तीदार और माला राय जैसी वरिष्ठ हस्तियां शामिल थीं।
बैठक का सबसे चौंकाने वाला और चर्चिच पहलू यह रहा कि प्रधानमंत्री आवास के सभागार में प्रत्येक सांसद के लिए पहले से आरक्षित सीट पर उनके नाम के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट कार्ड रखा हुआ था। इस ‘मार्कशीट’ में सांसदों के पिछले 90 दिनों के प्रदर्शन का बारीक ब्यौरा दर्ज था। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट कार्ड में मुख्य रूप से सांसदों की डिजिटल व सोशल मीडिया सक्रियता का मूल्यांकन किया गया था। इसमें यह स्पष्ट रूप से अंकित था कि संबंधित सांसद ने तीन महीनों के दौरान एक्स पर कितने ट्वीट किए, फेसबुक पर कितनी पोस्ट साझा कीं, इंस्टाग्राम पर उनकी मौजूदगी कैसी रही और जनता के बीच उनके पोस्ट को कितना समर्थन या एंगेजमेंट मिला।
प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों के साथ संवाद करते हुए उन्हें केवल सदन के भीतर तक सीमित न रहने की स्पष्ट सलाह दी। उन्होंने व्यक्तिगत स्वास्थ्य, जमीनी जनसंपर्क, सोशल मीडिया के रणनीतिक उपयोग और जनता के बीच सतत उपस्थिति जैसे विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का जनता से निरंतर संवाद और डिजिटल मंचों पर सक्रियता बेहद आवश्यक है।
बैठक में तृणमूल छोड़कर आए नेताओं के अलावा उद्धव ठाकरे गुट से अलग हुए सात पूर्व सांसद, नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रतिनिधि और अजित पवार गुट के सांसद भी शामिल हुए। बैठक से पहले वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्वीकार किया कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने ऐसी अनूठी और तकनीक-आधारित बैठक पहली बार देखी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ने इस व्यवस्थित मूल्यांकन के जरिए यह साफ संदेश दे दिया है कि भविष्य की राजनीति में जनसंपर्क और डिजिटल जवाबदेही को संसदीय प्रदर्शन के बराबर ही तवज्जो दी जाएगी।
मोदी की बैठक में सांसदों को मिला 90 दिन का ‘मार्कशीट’
