केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि कर नीति पर बहस केवल क्षेत्रीय हितों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की व्यापक जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष, पूर्वानुमेय और निवेश व नवाचार के अनुकूल कर व्यवस्था पर जोर दिया। यहां ‘न्यू एज टैक्सेशन’ विषय पर आयोजित आठवें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि हाल के वर्षों में कर सुधारों का उद्देश्य अनुपालन को आसान बनाना, मुकदमों को कम करना और करदाताओं को अधिक निश्चितता प्रदान करना रहा है। उन्होंने फेसलेस असेसमेंट और अपील, प्री-फिल्ड व अपडेटेड रिटर्न, विभागीय अपीलों के लिए बढ़ाई गई मौद्रिक सीमाओं और ‘विवाद से विश्वास’ योजना जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने 2019 में कॉरपोरेट टैक्स को घटाकर 22 प्रतिशत किए जाने, 2025 में व्यक्तिगत आयकर ढांचे में बदलाव और 1961 के कानून की जगह नए आयकर अधिनियम को लागू किए जाने को भी प्रमुख सुधार बताया। GST पर उन्होंने कहा कि दरों के युक्तिकरण के बाद अब अक्टूबर में होने वाली GST परिषद की अगली बैठक में प्रक्रिया संबंधी सुधारों पर ध्यान दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय कराधान के क्षेत्र में उन्होंने कर संधियों में बदलाव, बहुपक्षीय समझौते, एंटी-अवॉयडेंस नियम और स्वचालित सूचना आदान-प्रदान जैसे कदमों का उल्लेख किया। डिजिटल अर्थव्यवस्था पर उन्होंने डिजिटल कंपनियों, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स, क्लाउड सेवाओं और सीमा-पार लेनदेन के कराधान को सावधानीपूर्वक देखने की आवश्यकता बताई, खासकर निवेश पर उनके संभावित प्रभाव को देखते हुए। उन्होंने डिजिटल भुगतान को और बढ़ावा देने की अपील की और भारत की 7.8 प्रतिशत पहली तिमाही की आर्थिक वृद्धि का श्रेय नागरिकों, उद्योग और MSMEs के योगदान को दिया। साथ ही, उन्होंने वैश्विक टैरिफ संबंधी खतरों, युद्धों, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति तथा कच्चे तेल और उर्वरक की कीमतों जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कर नीति को विकास के लिए आवश्यक राजस्व जुटाते हुए निवेश, उद्यमिता और नवाचार में बाधा नहीं बनना चाहिए।
कर नीति निष्पक्ष, पूर्वानुमेय और निवेश-अनुकूल हो: सीतारमण
