पश्चिम बंगाल से उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों में हो रहे छात्रों के बड़े पैमाने पर पलायन (एक्सोडस) को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोलकाता में आयोजित एक प्रबुद्ध सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पश्चिम बंगाल को अपनी बौद्धिक विरासत को बचाए रखना है, तो राज्य सरकार और शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि बेहतर अवसरों, आधुनिक पाठ्यक्रम और समय पर परीक्षा व परिणाम न होने के कारण राज्य की सबसे बेहतरीन प्रतिभाएं दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अन्य प्रमुख शिक्षा केंद्रों की ओर रुख कर रही हैं, जिससे बंगाल में “बौद्धिक शून्यता” की स्थिति पैदा हो रही है।
इस गंभीर समस्या के समाधान पर जोर देते हुए दासगुप्ता ने कहा कि केवल अतीत के गौरवगान से काम नहीं चलेगा, बल्कि वर्तमान में एक ऐसा प्रगतिशील और वैश्विक स्तर का शैक्षणिक माहौल तैयार करना होगा जो युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा कर सके। उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा के स्तर को राजनीति से मुक्त करने, बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और नए युग के रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शोध के अवसर प्रदान करके ही इस मेधावी कार्यबल (ब्रेन ड्रेन) को राज्य के भीतर रोका जा सकता है, जो अंततः बंगाल के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देने में मददगार साबित होगा।
