भारत-बांग्लादेश सीमा पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक तत्परता

 मुख्यमंत्री के हालिया कड़े निर्देशों के बाद, मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबित भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस सिलसिले में गुरुवार को मालदा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।

प्रशासनिक बैठक और रणनीति:

मालदा के जिला मजिस्ट्रेट (DM) राजनवीर सिंह कपूर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के शीर्ष अधिकारी, जिला भूमि एवं भूमि राजस्व विभाग और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पर “जमीन के पेंच” को सुलझाना और अधिग्रहण कार्य की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना था।

सीमा की स्थिति और चुनौतियाँ:

मालदा जिले में भारत-बांग्लादेश की लगभग 172 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 33 किलोमीटर हिस्सा अभी भी खुला (Unfenced) है।सबसे अधिक खुला हिस्सा हबीबपुर और बामनगोला ब्लॉक में है। इसके अलावा इंग्लिश बाजार और कालियाचक-3 ब्लॉक में भी कई किलोमीटर सीमा असुरक्षित है। पूर्ववर्ती प्रयासों के बावजूद, भूमि विवादों के कारण कटीले तारों (Fencing) का काम अटका हुआ था। अब नई सरकार के मुख्यमंत्री ने डेढ़ महीने के भीतर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने का समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित किया है।

अधिकारियों और प्रतिनिधियों के बयान:

गोपाल मिश्र (असिस्टेंट इंजीनियर, CPWD): उन्होंने तकनीकी पहलुओं और सड़क निर्माण के साथ-साथ फेंसिंग की रूपरेखा पर जानकारी दी। রাজনবীর সিং কাপুর (जिला मजिस्ट्रेट, मालदा): उन्होंने बताया कि प्रशासन तेजी से समन्वय कर रहा है ताकि मुख्यमंत्री द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर जमीन का हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके। ईशा खान चौधरी (सांसद, दक्षिण मालदा): कांग्रेस सांसद ने भी इस प्रक्रिया पर अपनी नजर बनाए रखने और स्थानीय किसानों व निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान की बात कही।

निष्कर्ष:

इस बैठक में भूमि अधिग्रहण की अंतिम रूपरेखा (Blueprint) तैयार कर ली गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस कदम से न केवल सीमा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि घुसपैठ और तस्करी जैसी गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।

By Sonakshi Sarkar