कोलकाता में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बीच दुर्गा पूजा समितियों पर पुलिस की नजर आयोजकों का डेटाबेस तैयार करने का अभियान शुरू

पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन और बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच कोलकाता पुलिस ने शहर की दुर्गा पूजा समितियों पर अपनी निगरानी तेज कर दी है. लालबाजार के निर्देशों के बाद, शहर के सभी थानों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आयोजित होने वाली दुर्गा पूजाओं और उनके आयोजक क्लबों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार करने के लिए कहा गया है. इस अभियान के तहत पुलिस यह पता लगा रही है कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के जाने के बाद कौन से क्लब इस बार उत्सव का आयोजन कर रहे हैं, क्या उन्हें कोई नए राजनीतिक संरक्षक मिले हैं, और वहां किन वीआईपी मेहमानों के आने की उम्मीद है. पुलिस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करना, सड़कों पर लगने वाले जाम से निपटना और पूजा के आयोजन को लेकर होने वाले संभावित राजनीतिक विवादों को पहले ही रोकना है.  

इस जांच का एक बड़ा कारण यह है कि कोलकाता की करीब तीन हजार पंजीकृत दुर्गा पूजाओं में से कई बड़े बजट वाली पूजा समितियां सीधे तौर पर टीएमसी नेताओं के संरक्षण में फल-फूल रही थीं. वर्तमान परिदृश्य में कई टीएमसी राजनेताओं के जेल में होने या चुनावी हार के बाद उनका प्रभाव कम होने के कारण इन पूजाओं के आयोजन और उनके भव्य पैमाने को लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई है. उदाहरण के लिए, पूर्व मंत्री अरूप विश्वास के संरक्षण में होने वाली प्रसिद्ध ‘सुरुचि संघ’ पूजा समिति के सचिव ने बताया कि भूमि मालिक द्वारा जगह खाली करने के नोटिस के कारण इस बार आयोजन संशय में है. इसके अतिरिक्त, चुनाव आयोग द्वारा चुनाव से पहले किए गए बड़े पैमाने पर तबादलों के चलते थानों में तैनात कई नए पुलिस अधिकारियों को दुर्गा पूजा के प्रबंधन का पूर्व अनुभव नहीं है, जिसके चलते पुलिस आयुक्त अजय नंद ने उन्हें समय रहते सभी आवश्यक जानकारियां जुटाने और तैयारी पूरी रखने के निर्देश दिए हैं.

By rohan