कोलकाता पुलिस ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और हाल के दिनों में बढ़े बाहरी लोगों के आगमन पर नजर रखने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस मुहिम के तहत शहर के विभिन्न थानों की पुलिस अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में फुटपाथों, फ्लाईओवर के नीचे, रेलवे स्टेशनों के समीप और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले बेघर लोगों (होमलेस) के पहचान पत्रों और आवश्यक दस्तावेजों का गहन सत्यापन (वेरिफिकेशन) कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर में रहने वाले वास्तविक निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार की संदिग्ध या अवैध गतिविधियों को रोकना है।
इस सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस बेघर लोगों से उनके आधार कार्ड, वोटर आईडी या उनके मूल निवास स्थान से जुड़े अन्य दस्तावेजों की मांग कर रही है। जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनका एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिसमें उनके नाम, उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) और तस्वीरें शामिल की जा रही हैं ताकि भविष्य में उनकी पहचान सुलभ हो सके। सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने इस कदम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे अत्यंत गरीब और बेसहारा लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जबकि पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक नियमित सुरक्षा प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
