हावड़ा: ४०० रुपये कमाने वाले दिहाड़ी मजदूर ने विधानसभा चुनाव में ठोकी ताल; गांव में बिजली लाने वाले अभिजीत का प्रतीक है ‘कॉलिंग बेल’

पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के आमता विधानसभा क्षेत्र में इस बार एक ऐसा उम्मीदवार मैदान में है, जिसने अपनी सादगी और संघर्ष से सबका ध्यान खींचा है। आमता के तेगेछिया गांव के रहने वाले अभिजीत हाजरा, जो पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर हैं और प्रतिदिन मात्र ४०० रुपये कमाते हैं, इस बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।२००३ में गांव में लाए थे रोशनीअभिजीत हाजरा इस इलाके के लिए कोई नया नाम नहीं हैं। साल २००३ में उनके अटूट संघर्ष और कोशिशों की बदौलत ही तेगेछिया गांव में पहली बार बिजली का कनेक्शन आया था। गांव में बिजली लाने के लिए उनके उस ‘नाछोड़’ (दृढ़) व्यवहार की वजह से वे स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

घर में मां, बड़े भाई और भाभी हैं, लेकिन अभिजीत ने अब तक शादी नहीं की और अपना जीवन जनसेवा के लिए समर्पित कर रखा है।चुनाव लड़ने का अनोखा मकसदअभिजीत ने बताया कि उन्होंने केवल वोट देने तक सीमित न रहकर, पूरी चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारी की बारीकियों को समझने के लिए अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर नामांकन भरा है। उनका चुनाव चिन्ह ‘कॉलिंग बेल’ है।अभिजीत का कहना है, “मैं जानना चाहता था कि विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया कैसे काम करती है। जिस तरह मैंने २००३ में गांव में बिजली लाने की लड़ाई जीती थी, मुझे उम्मीद है कि इस बार भी जनता का भरपूर समर्थन मिलेगा।”

मंदिर के पास रखी ‘सुझाव पेटी’ (Suggestion Box)अभिजीत के प्रचार का तरीका भी बेहद अनोखा और लोकतांत्रिक है। उन्होंने तेगेछिया मैदान के पास स्थित मंदिर में एक ‘सजेशन बॉक्स’ रखा है। सुबह से शाम तक ग्रामीण इस बक्से में अपनी समस्याओं और भविष्य के विकास के लिए जरूरी सुझाव लिखकर डालते हैं। अभिजीत इन्हीं सुझावों को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना रहे हैं।ग्रामीणों में उत्साहगांव के लोग अपने बीच के एक साधारण मजदूर को प्रत्याशी के रूप में देखकर काफी उत्साहित हैं। इलाके में चर्चा है कि जहां बड़े-बड़े नेता करोड़ों खर्च कर रहे हैं, वहीं एक दिहाड़ी मजदूर अपनी ‘कॉलिंग बेल’ के जरिए बदलाव की घंटी बजाने की कोशिश कर रहा है।

By Sonakshi Sarkar