असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार देखा गया दुर्लभ येलो-थ्रोटेड मार्टेन

असम के प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में पहली बार एक दुर्लभ ‘येलो-थ्रोटेड मार्टेन’ देखा गया है। मुख्य वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस छोटे मांसाहारी शिकारी जीव की मौजूदगी की पुष्टि राष्ट्रीय उद्यान के सेमी-एवरग्रीन जंगली इलाकों में नियमित रूप से की जाने वाली कैमरा ट्रैपिंग के दौरान ली गई तस्वीरों से हुई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर इस खोज की जानकारी साझा करते हुए इसे असम के बेहतरीन संरक्षण मॉडल की एक बड़ी सफलता बताया है, जो केवल मुख्य परिदृश्यों की रक्षा ही नहीं करता बल्कि एक समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र को भी बढ़ावा देता है। यह खोज इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की समृद्ध जैव विविधता और मजबूत वन्यजीव लचीलेपन को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, ‘येलो-थ्रोटेड मार्टेन’ अपनी फुर्ती, अनुकूलन क्षमता और आकर्षक रूप के लिए जाना जाता है, जो मुख्य रूप से जंगलों के पुनर्जीवन और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए बीजों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची दो के तहत संरक्षित यह जीव मुख्य रूप से हिमालयी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पाया जाता है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जो दुनिया में एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी आबादी के साथ-साथ बाघों, हाथियों और हजारों पक्षियों का घर है, वर्तमान में पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल कर रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष दो हजार पच्चीस-छब्बीस में यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या पंद्रह प्रतिशत से अधिक बढ़कर चार लाख अड़सठ हजार (4.68 लाख) तक पहुंच गई है, जिसमें विदेशी पर्यटकों की संख्या एक वर्ष में सत्रह हजार छह सौ तिरानवे (17,693) से लगभग दोगुनी होकर तीस हजार चार सौ चौहत्तर (30,474) हो गई है।

By rohan