असम सरकार ने अंतरिम बजट के कारण दो महीने के लिए रियायती राशन सामग्री का वितरण रोका

असम सरकार ने राज्य में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद वोट-ऑन-अकाउंट की निरंतरता का हवाला देते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाली रियायती दालों, चीनी और नमक के वितरण को दो महीने के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा समाचार पत्रों में जारी किए गए एक विज्ञापन के अनुसार, पात्र लोगों को कम कीमतों पर दी जाने वाली इन तीनों खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति जून महीने से रोक दी गई है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य वर्तमान में अंतरिम बजट के तहत काम कर रहा है और वर्ष दो हजार छब्बीस-सत्ताइस (2026-27) के लिए पूर्ण बजट जुलाई में नई सरकार द्वारा पेश किया जाएगा. इसके बाद जुलाई में बजट पारित होने के बाद, अगस्त महीने से यह योजना दोबारा शुरू कर दी जाएगी.  

विभाग ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि इस संक्रमण काल के दौरान विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले मासिक मुफ्त चावल का वितरण बिना किसी रुकावट के निरंतर जारी रहेगा. सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि यदि मई महीने के वितरण चक्र के बाद कुछ उचित मूल्य की दुकानों (राशन की दुकानों) के पास मसूड़ की दाल, चीनी और नमक का पुराना स्टॉक बचा हुआ है, तो उसे इसी महीने गरीब परिवारों में बांट दिया जाएगा. गौरतलब है कि फरवरी महीने में विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन वित्त मंत्री अजंता नेओग ने आवश्यक सेवाओं पर होने वाले सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए बासठ हजार दो सौ चौरानवे दशमलव सात आठ (62,294.78) करोड़ रुपये का वोट-ऑन-अकाउंट मांगा था. उन्होंने बताया था कि भोजन के बुनियादी अधिकार को सुरक्षित करते हुए सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सत्तर दशमलव सात एक (70.71) लाख परिवारों को कवर कर दो दशमलव चार नौ (2.49) करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त चावल प्रदान कर रही है.

By rohan