10
Jul
पश्चिम बंगाल की धर्मनिरपेक्ष राजनीति की सार्वजनिक धारणा के विपरीत, राज्य का औपनिवेशिक और विभाजन-पूर्व का इतिहास वास्तव में सांप्रदायिक राजनीति से अछूता नहीं रहा है. लेख के अनुसार, वर्ष 1930 और 1940 के दशकों के दौरान हिंदू राष्ट्रवादी विचारों ने बंगाल के भद्रलोक उच्च-मध्यम वर्ग के राजनीतिक विमर्श को गहराई से आकार दिया था. इस दौर में राजनीतिक दलों ने चुनावों में खुलकर धर्म आधारित और विभाजन से जुड़े मुद्दों को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया था. बीती सदी की यही सांप्रदायिक पृष्ठभूमि वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी भाजपा के ध्रुवीकरण और हिंदू पहचान से जुड़े एजेंडे के…
