24
Aug
पारंपरिक झूलन उत्सव के आगमन के बावजूद नदिया जिले के कृष्णनगर (घूर्णी) के विश्व प्रसिद्ध मिट्टी के पुतले और मूर्ति शिल्प पर गहरी मंदी का साया मंडरा रहा है। भौगोलिक संकेत यानी जीआई (GI) टैग मिलने के बाद भी छोटे और सीमांत मूर्तिकारों की हालत में कोई सुधार नहीं आया है। त्योहार के इस मौसम में भी मूर्तियों और पुतलों की बिक्री न होने के कारण कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे कई लोग इस पैतृक पेशे को छोड़कर अन्य कामों में जुटने लगे हैं। घूर्णी पुतला पट्टी के 30 वर्षों का अनुभव रखने…
