पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सिलीगुड़ी के विधायक और राज्य के नए पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर सिलीगुड़ी में अपना दायित्व ग्रहण किया। शहर के ‘मैनाक टूरिज्म प्रॉपर्टी’ स्थित पर्यटन विभाग के कार्यालय में पहुँचकर उन्होंने कार्यभार संभाला, जहाँ विभाग के अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत और अभिनंदन किया।स्वागत समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने कहा कि उत्तर बंगाल के पर्यटन को वैश्विक मंच पर नए सिरे से स्थापित करने के साथ-साथ पूरे राज्य के पर्यटन उद्योग को अधिक समृद्ध और आकर्षक बनाना उनका मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कहा:”हम बंगाल के पर्यटन को इस तरह पेश करना चाहते हैं, जिससे विश्व मानचित्र पर इसे एक विशिष्ट और नई पहचान मिले।”
आगामी 17 जून को होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक का जिक्र करते हुए शंकर घोष ने बताया कि वे पर्यटन उद्योग के विकास के लिए कई नए प्रस्ताव पेश करेंगे, जिन्हें बाद में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी रखा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पहाड़ों की लंबे समय से चली आ रही विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की बात भी कही।ट्रैफिक जाम और चाय बागानों के संरक्षण पर विशेष ध्यान:यातायात समस्या का समाधान: पर्यटन मंत्री ने कहा कि घूम से दार्जिलिंग तक के मार्ग पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम के कारण पर्यटकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। इस संबंध में जिला प्रशासन के साथ चर्चा हो चुकी है और जल्द ही इसका स्थायी समाधान निकाला जाएगा।पर्यटन और चाय उद्योग में संतुलन: उत्तर बंगाल के चाय उद्योग के विकास और संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर चाय बागानों को कोई नुकसान नहीं पहुँचने दिया जाएगा। सरकार पर्यटन और चाय उद्योग दोनों के बीच बेहतर संतुलन बनाकर विकास के पथ पर आगे बढ़ेगी।नए कार्यभार को संभालने के बाद पर्यटन मंत्री शंकर घोष की इन घोषणाओं से उत्तर बंगाल के पर्यटन क्षेत्र और इससे जुड़े हितधारकों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है।
