कोलकाता और उससे सटे इलाकों में ठंड के बढ़ते असर के साथ ही वायु प्रदूषण भी चिंता का कारण बनता जा रहा है। पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, रविवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 के करीब दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। अलीपुर से लेकर साल्टलेक तक शहर के कई वायु निगरानी केंद्रों की रिपोर्ट में हालात चिंताजनक पाए गए हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में जमीन के पास की हवा ठंडी होकर भारी हो जाती है। इसके चलते कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआं तथा जहरीले कण ऊपर नहीं जा पाते और जमीन के नजदीक ही फंसे रहते हैं। इस स्थिति को वैज्ञानिक भाषा में ‘इनवर्जन’ कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी, वायु प्रदूषण का असर और गंभीर हो सकता है।
पिछले एक सप्ताह तक साल्टलेक क्षेत्र की वायु गुणवत्ता नियंत्रण में थी, लेकिन रविवार को अचानक यह ‘खराब’ स्तर पर पहुंच गई। दूसरी ओर, विक्टोरिया मेमोरियल क्षेत्र में, जहां दिसंबर के अधिकांश समय प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है, वहां प्रदूषण में कुछ कमी दर्ज की गई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, विक्टोरिया क्षेत्र में प्रदूषण का मुख्य कारण मेट्रो रेल निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल थी। बोर्ड द्वारा सेना और मेट्रो रेल प्रशासन को सतर्क किए जाने के बाद स्थिति में कुछ सुधार देखा गया है।
इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों—फोर्ट विलियम, जादवपुर और बालीगंज—में भी वायु गुणवत्ता काफी चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि राहत की बात यह है कि दक्षिण कोलकाता के रवींद्र सरोवर इलाके में प्रदूषण का स्तर अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया है।
