जमाई षष्ठी का त्योहार मूल रूप से सास और दामाद के बीच स्नेह, आदर और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस पारंपरिक भावना को एक नई और मानवीय दिशा देते हुए सिलीगुड़ी के हाकिमपाड़ा इलाके में एक बेहद अनोखे ‘सामूहिक जमाई षष्ठी’ उत्सव का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर वृद्धाश्रम में रह रही बुजुर्ग माताओं ने पूरे रीति-रिवाज के साथ दामादों का वरण किया। माताओं के हाथों में वरण की थाली सौंपी गई और उन्होंने बड़े ही लाड-प्यार व आशीर्वाद के साथ मेहमानों का स्वागत व सत्कार किया।
समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाकर मानवता, सामाजिक एकजुटता और आपसी सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से जाने-माने समाजशास्त्री और समाजसेवी सुकांत बसु ने इस अनूठे कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस भावुक और गरिमापूर्ण समारोह में समाजसेवी पिंकी बर्मन सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति और आम लोग भारी संख्या में उपस्थित रहे।आयोजकों और उपस्थित प्रबुद्ध जनों के अनुसार:आयोजन समिति का वक्तव्य:”जो बुजुर्ग माताएं विभिन्न पारिवारिक और सामाजिक कारणों से अपने अपनों से दूर वृद्धाश्रम में जीवन व्यतीत कर रही हैं, उनके चेहरों पर सच्ची मुस्कान बिखेरना ही इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य था।
आज पारंपरिक रूप से दामाद का वरण करके इन माताओं को एक बार फिर अपने पारिवारिक उत्सव का पुराना आनंद और वही खोई हुई आत्मीयता वापस मिल गई है।”यह अनोखी और संवेदनशील पहल वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गई। सिलीगुड़ी की यह सामूहिक जमाई षष्ठी समाज के प्रति सहानुभूति, अपनों के प्रति जिम्मेदारी और इंसानी रिश्तों की गर्माहट की एक बेहतरीन और अनूठी मिसाल बनकर उभरी है।
