कोलकाता बंदरगाह की बढ़ी ताकत खिदिरपुर डॉक के पुनरुद्धार से जहाजों का टर्नअराउंड समय हुआ बेहद कम, सेंचुरी पोर्ट्स ने जारी किए आंकड़े

कोलकाता बंदरगाह के ऐतिहासिक खिदिरपुर डॉक के सफल पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण के बाद बंदरगाह पर जहाजों के आने-जाने और माल उतारने के कुल समय यानी टर्नअराउंड टाइम में भारी कमी दर्ज की गई है। इस बुनियादी ढांचा परियोजना के संचालन से जुड़े निजी भागीदार सेंचुरी पोर्ट्स ने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि पीपीपी यानी सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत किए गए इस कायाकल्प ने बंदरगाह की परिचालन क्षमता को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। पहले जिन मालवाहक जहाजों को बंदरगाह पर अपनी बारी और लोडिंग-अनलोडिंग के लिए कई दिनों तक लंबा इंतजार करना पड़ता था, अब आधुनिक बर्थिंग सुविधाओं और उन्नत क्रेन प्रणालियों के चलते उनका काम बहुत कम समय में पूरा हो रहा है, जिससे वैश्विक और घरेलू व्यापारिक जहाजों को बड़ी राहत मिली है।

खिदिरपुर डॉक के इस आधुनिकीकरण के सकारात्मक परिणामों ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट यानी कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के समग्र माल वहन प्रदर्शन को भी काफी मजबूत किया है। सेंचुरी पोर्ट्स के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, टर्नअराउंड समय में आई इस कमी से न केवल लॉजिस्टिक्स लागत में गिरावट आई है, बल्कि यह बंदरगाह अब नेपाल, भूटान और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए कार्गो हैंडलिंग का एक अधिक आकर्षक और प्रतिस्पर्धी केंद्र बन गया है। बुनियादी ढांचे में सुधार के तहत डॉक के भीतर पानी के ड्राफ्ट को बनाए रखने के लिए विशेष ड्रेजिंग और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। आने वाले महीनों में इस डॉक की क्षमता को और बढ़ाने के लिए अतिरिक्त निवेश करने की योजना है, जिससे कोलकाता बंदरगाह देश के समुद्री व्यापार में अपनी ऐतिहासिक और रणनीतिक स्थिति को और अधिक मजबूत कर सकेगा।

By rohan