प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जम्मू-कश्मीर की आठ पार्टियों के 14 नेताओं की बैठक की चर्चा पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी ख़ूब हो रही है।ये होना लाजिमी भी था क्योंकि बैठक कश्मीर को लेकर थी और दोनों देशों के बीच विवाद का अहम मुद्दा भी कश्मीर ही है। पाकिस्तान के मीडिया में भी इस बैठक ने सुर्खियाँ बटोरी हैं। पाकिस्तान के अहम अंग्रेज़ी अख़बार ‘द डॉन ने पहले पन्ने की बॉटम ख़बर बैठक की ही बनाई है। डॉन ने इस रिपोर्ट का शीर्षक दिया है- मोदी कश्मीर पर बैठक से छवि सुधारना चाहते हैं।
Today’s meeting on Jammu and Kashmir was conducted in a very cordial environment. Everyone expressed their commitment to democracy and the constitution. It was stressed to strengthen the democratic process in Jammu and Kashmir. pic.twitter.com/oa6ZYQVz9J
— Amit Shah (@AmitShah) June 24, 2021
डॉन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है। मोदी के साथ 14 कश्मीरी नेताओं की बैठक को चौंकाने वाली मुलाक़ात के तौर पर प्रचार किया गया। इस बैठक के बाद हर कोई मुस्कुराते हुए निकला. इस बैठक में हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस का नाम तक नहीं लिया गया।
”पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने राजनीति क़ैदियों को रिहा करने के लिए कहा है। ये वही महबूबा मुफ़्ती हैं जो सार्वजनिक रूप से अनुच्छेद 370 बहाल करने को कहती थीं.”
डॉन ने महबूबा मुफ़्ती के उस बयान को भी जगह दी है। जिसमें उन्होंने बैठक के बाद कहा था, ”हम अनुच्छेद 370 के लिए लड़ेंगे। चाहे इस लड़ाई में सालों लगे या महीनों. हमें ये विशेष दर्जा पाकिस्तान से नहीं मिला था बल्कि भारत से मिला था और नेहरू ने दिया था. इससे कोई समझौता नहीं हो सकता है।