मुजफ्फरपुर में सीओ का काला कारनामा, प्रभार देने के बाद अवैध रूप से म्यूटेशन के आवेदन किए थे निष्पादित

जमीन से जुड़े मामले में सरकार पारदर्शिता के लिए नए नए प्रविधान ला रही है। दूसरी ओर राजस्व अधिकारी ही इसमें पलीता लगा रहे हैं।
कुढ़नी के पूर्व अंचलाधिकारी अनिल कुमार संतोषी ने जिस तरह का कृत्य किया वह विभाग के लिए सोचनीय होगा। तबादले और प्रभार देने के बाद भी उन्होंने अवैध तरीके से एक-दो नहीं 20 दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के आवेदनों का ताबड़तोड़ निपटारा कर दिया।यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि इनमें से महज दो को ही अस्वीकृत किया गया। वह भी इसलिए कि इसमें आपत्ति दर्ज थी। यही नहीं उन्होंने रैयत की जमीन का रकबा भी गलत तरीके से बढ़ा दिया। डीएम कुमार गौरव द्वारा गठित तीन अधिकारियों की संयुक्त जांच रिपोर्ट में पूर्व सीओ अनिल कुमार संतोषी के कार्य को गंभीर अनियमितता की श्रेणी में पाया। साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है। अनिल कुमार संतोषी वर्तमान में पूर्वी चंपारण में बंदोबस्त कार्यालय में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
शाम चार बजे दिया प्रभार, रात लगभग नौ बजे तक सरकारी डोंगल का अवैध रूप से किया उपयोग
विदित हो कि मामले की शिकायत आने के बाद डीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया था। इसमें एसडीओ पश्चिमी, डीसीएलआर पश्चिमी और जिला राजस्व प्रशाखा के प्रभारी पदाधिकारी को शामिल किया गया था। इसकी संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि अनिल कुमार संतोषी ने कुढ़नी सीओ का प्रभार चार जुलाई की शाम चार बजे नीलम कुमारी को दिया। इसके बाद वह शाम 6:24 बजे से रात 8:50 बजे तक सरकारी डोंगल का अवैध रूप से उपयोग किया। इस दौरान प्रयुक्त डिजिटल हस्ताक्षर अनिल कुमार संतोषी के थे।
प्रभार के बाद दाखिल-खारिज के 20 मामले निपटाए गए। इसमें यह बात भी सामने आई कि आवेदनों के निष्पादन में फीफो (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) नियम का भी पालन नहीं किया गया। सबसे पहले वाद संख्या 1643 का निष्पादन किया गया। वहीं सबसे अंत में वाद संख्या 627 का। इसके बीच में वाद संख्या 582 और 585 का निपटारा हुआ। दो वाद संख्या 1250 और 1251 को अस्वीकृत किया गया। इन मामलों में आपत्ति थी। इसके अलावा अन्य वाद में भी आपत्ति थी, उसे स्वीकृत कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि विधिवत प्रभार हस्तांतरित करने के बाद भी अनिल कुमार संतोषी ने डिजिटल हस्ताक्षर (डोंगल) का उपयोग करते हुए आदेश पारित किए। उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह कार्य किया है।
मामले की जांच में यह बात भी समाने आई कि पूर्व सीओ ने खतियानी रकबा से अधिक की जमाबंदी कायम कर दी। वाद संख्या 627 के निष्पादन के दौरान राजस्व अधिकारी पवन कुमार वर्मा ने रिपोर्ट में जिक्र किया था कि खतियान में 12.5 डिसमिल रकबा ही शेष है। इस वाद में आपत्ति भी थी। इसके बावजूद पूर्व सीओ ने 25 डिसमिल जमीन की जमाबंदी कायम कर दी। संयुक्त टीम की रिपोर्ट के बाद पूर्व सीओ पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

By Paromita