भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में 2026 के पहले नौ महीनों में 52% की वृद्धि, मोटर बीमा कवरेज को लेकर बढ़ी चिंता

वाहन (Vahan) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच 25.37 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का पंजीकरण हुआ। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 51.9% अधिक है। इसके साथ ही, 2026 के पहले नौ महीनों में ही ईवी पंजीकरण का आंकड़ा पूरे वर्ष 2025 में दर्ज कुल पंजीकरण से आगे निकल गया।

पिछले वर्ष की समान अवधि में 16.70 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ था। कुल नए वाहनों के पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 10.7% हो गई, जबकि एक साल पहले यह 8.6% थी। सितंबर में इस साल अब तक का सबसे अधिक मासिक पंजीकरण दर्ज किया गया। इस महीने 3,37,240 इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हुआ, जो सालाना आधार पर 76.1% की वृद्धि है।

इसी पृष्ठभूमि में टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों से अपनी मोटर बीमा पॉलिसियों की समीक्षा करने का आग्रह किया है। कंपनी ने बैटरी को नुकसान, विशेष मरम्मत की जरूरतों और चार्जिंग से जुड़ी घटनाओं जैसे उभरते जोखिमों को इसका कारण बताया है।

टाटा एआईजी में मोटर अंडरराइटिंग के प्रमुख ए. किरण कुमार ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में वाहन मालिकों के लिए इन वाहनों से जुड़े विशिष्ट जोखिमों और उनकी सुरक्षा संबंधी जरूरतों को समझना जरूरी है।

बीमा कंपनी ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे अपनी पॉलिसी में बैटरी से संबंधित नुकसान, चार्जिंग उपकरण, दुर्घटना से होने वाले नुकसान और उपलब्ध अतिरिक्त कवर की जांच करें। इनमें इलेक्ट्रिक सर्ज प्रोटेक्शन, बैटरी कन्वीनियंस और वॉल चार्जर प्रोटेक्शन जैसे ऐड-ऑन शामिल हैं। हालांकि, इनकी उपलब्धता संबंधित पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अधीन होगी।

इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों और वाणिज्यिक ईवी को बढ़ते स्तर पर अपनाए जाने से फ्लीट स्तर पर बीमा सुरक्षा की जरूरत भी सामने आई है। इसमें वाहनों को होने वाले नुकसान, मरम्मत के कारण कामकाज में लगने वाला अतिरिक्त समय और परिचालन संबंधी बाधाओं से सुरक्षा शामिल है। मौजूदा रफ्तार जारी रहने पर भारत में 2026 के दौरान लगभग 33.8 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण का आंकड़ा दर्ज हो सकता है।

By Business Bureau