विशाल जनसंख्या और बड़ा भूगोल पश्चिम बंगाल को मौजूदा तेईस जिलों से अधिक जिलों की क्यों है जरूरत, प्रशासनिक सुधारों पर विशेष रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक दक्षता और बेहतर लोक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा तेईस जिलों की संख्या को बढ़ाने की जरूरत पर व्यापक चर्चा हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल जनसंख्या के मामले में देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है, जिसकी आबादी लगभग दस करोड़ से अधिक है। वर्तमान में राज्य का औसतन एक जिला लगभग पैंतालीस लाख नागरिकों को प्रशासनिक सेवाएं प्रदान करता है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। उत्तर चौबीस परगना और दक्षिण चौबीस परगना जैसे विशाल जिले तो आबादी के मामले में देश के कई छोटे राज्यों से भी बड़े हैं। इतनी विशाल जनसंख्या और बड़े भौगोलिक क्षेत्र के कारण दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के लिए जिला मुख्यालयों तक पहुंचना बेहद कठिन और खर्चीला हो जाता है, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून व्यवस्था की निगरानी में भी बड़ी चुनौतियां आती हैं।

इस प्रशासनिक संकट के समाधान और विकास की गति को तेज करने के लिए विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का मानना है कि जिलों का पुनर्गठन और नए जिलों का निर्माण अब समय की मांग बन चुका है। जिलों के छोटे होने से न केवल जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के लिए कानून व्यवस्था संभालना आसान हो जाता है, बल्कि आम नागरिकों को भी अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने पूर्व में भी सुंदरवन, इच्छामती और बशीरहाट जैसे कई नए जिलों के गठन की सैद्धांतिक घोषणाएं की हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे के निर्माण और वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण यह प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाई है। प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की तर्ज पर यदि बंगाल भी अपने बड़े जिलों को छोटे हिस्सों में विभाजित करता है, तो इससे अंतिम छोर तक शासन की पहुंच मजबूत होगी और राज्य के विकास को एक नई गति मिलेगी।

By rohan