पश्चिम बंगाल के राजारहाट न्यू टाउन विधानसभा क्षेत्र के चुनावी नतीजों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस सीट पर अट्ठारह दौर की मतगणना के अंतिम राउंड में नाटकीय उलटफेर देखने को मिला, जहाँ कथित तौर पर रोके गए बूथ संख्या एक सौ चौंसठ की गिनती की गई। इस विशेष बूथ पर कुल छह सौ छप्पन वोट पड़े थे, जिनमें से आश्चर्यजनक रूप से भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा को छह सौ सैंतीस वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस को केवल पांच वोटों से संतोष करना पड़ा। इसका सीधा मतलब यह है कि भाजपा ने अकेले इस बूथ से कुल मतदान का सत्तानवे प्रतिशत हिस्सा हासिल कर लिया। इस चौंकाने वाले आंकड़े ने इसलिए तूल पकड़ लिया है क्योंकि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार इस बूथ के कुल मतदाताओं में से लगभग अठासी प्रतिशत मतदाता मुस्लिम समुदाय से आते हैं।
इस अप्रत्याशित चुनावी परिणाम के सामने आने के बाद स्थानीय मुस्लिम मतदाताओं और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने ईवीएम की सत्यता और पूरी मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र के मुस्लिम मतदाताओं ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रशासन से पूछा है कि जब उन्होंने स्वेच्छा से सत्तारूढ़ दल को वोट दिया था, तो उनके वोट अचानक कहाँ चले गए? इस विवादित बूथ के नतीजों के दम पर भाजपा उम्मीदवार पीयूष कनोडिया ने टीएमसी के तापस चटर्जी को महज तीन सौ सोलह वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराकर सीट पर कब्जा कर लिया। तृणमूल कांग्रेस ने इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में एक बड़ी चूक और धांधली बताते हुए मामले को कानूनी स्तर पर ले जाने की बात कही है, जिसने बंगाल के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चुनावी पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
