एएससीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में लगभग 100 प्रतिशत स्वैच्छिक अनुपालन दर्ज किया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 99.7 प्रतिशत का स्वैच्छिक अनुपालन दर्ज किया है। अलग अलग आकार और पहुंच वाले विज्ञापनदाताओं ने एएससीआई की विज्ञापन में संशोधन संबंधी सिफारिशों का पालन किया। भारत के तेज रफ्तार और बिखरे हुए डिजिटल विज्ञापन माहौल को देखते हुए यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। एएससीआई के इतिहास में यह अब तक का सबसे ऊंचा स्वैच्छिक अनुपालन स्तर है।एएससीआई की वार्षिक शिकायत रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में स्वैच्छिक अनुपालन 86 प्रतिशत था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 83 प्रतिशत रहा।वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान एएससीआई ने अलग-अलग सेक्टरों में फैले 1,089 विज्ञापनों से जुड़े 1,616 मामलों का निपटारा किया। इन 1,089 विज्ञापनों में से 179 विज्ञापन इंफ्लुएंसर मार्केटिंग से जुड़े थे, जो तेजी से बदलते डिजिटल विज्ञापन माहौल पर एएससीआई की लगातार निगरानी को दर्शाता है।

स्वैच्छिक अनुपालन का यह स्तर डिजिटल विज्ञापन व्यवस्था की प्रकृति को देखते हुए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। अलग अलग प्लेटफॉर्म, प्रारूप और प्रतिभागियों के बीच यह व्यवस्था बिखरी हुई है और इसमें पहले तेजी, बाद में अनुपालन जैसी सोच देखने को मिलती है, जिससे लगातार नियम पालन कराना मुश्किल हो जाता है।पहली तिमाही के आंकड़े यह दिखाते हैं कि विज्ञापनदाता एएससीआई की सिफारिशों के अनुसार समय रहते विज्ञापनों में बदलाव कर रहे हैं या उन्हें हटा रहे हैं। यह प्रवृत्ति केवल बड़े और स्थापित विज्ञापनदाताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और उभरते विज्ञापनदाताओं तथा व्यक्तिगत इंफ्लुएंसर्स पर भी लागू होती है। इससे यह संकेत मिलता है कि स्वैच्छिक अनुपालन कुछ चुनिंदा बड़े खिलाड़ियों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर एक रुझान की तरह बढ़ रहा है।प्रिंट और टीवी में स्वैच्छिक अनुपालन आम तौर पर बहुत ऊंचा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 97 प्रतिशत था, जबकि डिजिटल विज्ञापन अब भी चिंता का मुख्य क्षेत्र बना हुआ है। ऐसे में इस तिमाही में डिजिटल और पारंपरिक मीडिया के अनुपालन स्तर के लगभग बराबर पहुंचना एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह लगभग पूर्ण स्वैच्छिक अनुपालन भारत के स्व-नियामक विज्ञापन ढांचे की एक बड़ी उपलब्धि है। यह इस बात का भी संकेत है कि विज्ञापनदाता, एजेंसियां, इंफ्लुएंसर और डिजिटल प्लेटफॉर्म अब पारदर्शी, सटीक और जिम्मेदार विज्ञापन के महत्व को पहले से अधिक समझ रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता का भरोसा अब सिर्फ अनुपालन की औपचारिक शर्त नहीं, बल्कि कारोबार की अनिवार्यता बन गया है।

ये नतीजे यह भी दिखाते हैं कि स्व-नियमन एक सहयोग आधारित व्यवस्था के रूप में कितना प्रभावी है। यह उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए जिम्मेदार कारोबारी विकास को भी आगे बढ़ाती है।एएससीआई की सीईओ और सेक्रेटरी जनरल मनीषा कपूर ने कहा, ‘’99.7 प्रतिशत का स्वैच्छिक अनुपालन स्तर जिम्मेदार विज्ञापन के प्रति उद्योग की प्रतिबद्धता और भारत के स्व-नियामक मॉडल की प्रभावशीलता का मजबूत संकेत है। विज्ञापनदाता अब तेजी से यह समझ रहे हैं कि उपभोक्ता का भरोसा सच्चे और पारदर्शी संवाद से ही अर्जित होता है। यह विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों, इंफ्लुएंसर्स, प्लेटफॉर्मों, नियामकों और एएससीआई के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। जैसे जैसे विज्ञापन, खासकर डिजिटल माध्यमों में, विकसित हो रहा है, एएससीआई नवाचार को सहयोग देते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा कि हर संवाद के केंद्र में उपभोक्ता हित बने रहें। हमें कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल यानी सीसीसी के समर्पित काम को भी स्वीकार करना चाहिए, जो एक स्वतंत्र निर्णायक निकाय है और जिसमें उद्योग तथा नागरिक समाज के सदस्य बहुमत में हैं। साथ ही हमारे अनेक तकनीकी विशेषज्ञों का भी आभार, जो अपना समय और सुझाव देकर एएससीआई के काम में उपभोक्ता भरोसे को केंद्र में बनाए रखने में मदद करते हैं।‘’

By Business Bureau