अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सिलीगुड़ी के बाबूपाड़ा स्थित ‘विद्यार्थी कल्याण भवन’ में एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता आयोजित की। इस बैठक के माध्यम से संगठन ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों के भीतर किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रभाव या भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
छात्रों के हित सर्वोपरि
बुधवार को आयोजित इस बैठक में एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पूजा राम और प्रदेश सचिव दीप दत्त मुख्य रूप से उपस्थित थे। नेतृत्व ने साझा संदेश दिया कि शिक्षा के मंदिरों को राजनीति से मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन के लिए छात्रों का हित सबसे ऊपर है और कैंपस के भीतर केवल शिक्षा और विकास का माहौल होना चाहिए।
बड़े अभियान की तैयारी
राज्य में बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य के बीच, एबीवीपी ने घोषणा की है कि वे जल्द ही विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान (Membership Drive) शुरू करेंगे। इस पहल का उद्देश्य बंगाल के उच्च शिक्षण संस्थानों में संगठन की उपस्थिति को और अधिक मजबूत और सक्रिय बनाना है।
एबीवीपी की प्रमुख मांगें:
छात्र संघ चुनाव: संगठन ने मांग की है कि राज्य के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में तुरंत छात्र संघ चुनाव (Student Union Elections) कराए जाएं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधि ही छात्रों की समस्याओं का सही समाधान कर सकते हैं।
दबंगई पर रोक: कैंपस के भीतर किसी भी तरह की ‘दादागिरी’ या छात्रों के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुरक्षित वातावरण: एबीवीपी ने छात्रों की सुरक्षा और पारदर्शी शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करने के लिए हमेशा मुखर रहने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष:
चुनाव परिणामों के बाद बदले माहौल में एबीवीपी का यह कड़ा रुख उत्तर बंगाल की छात्र राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। संगठन ने साफ कर दिया है कि वे छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज करेंगे।
