सनातन धर्म में पूजनीय देवी-देवताओं के चित्रों के व्यावसायिक और अनुचित उपयोग के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए दो युवाओं ने एक बेहद कठिन और साहसिक कदम उठाया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के फलाकाटा के रहने वाले दो युवक समाज को एक बड़ा संदेश देने के उद्देश्य से साइकिल से केदारनाथ धाम की यात्रा पर रवाना हुए हैं।केदारनाथ तक का 30 दिनों का सफरफलाकाटा के धूपगुड़ी मोड़ निवासी कृष्णेंदु दे अपने मित्र बिप्लब के साथ मिलकर इस साइकिल यात्रा पर निकले हैं।
लगभग 30 दिनों की इस लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा के दौरान दोनों युवा फलाकाटा से रवाना होकर सिलीगुड़ी, घोषपुकुर और नक्सलबाड़ी होते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के रास्ते उत्तराखंड स्थित बाबा केदारनाथ धाम पहुँचेंगे। रास्ते में वे जगह-जगह लोगों को अपने इस अभियान के प्रति जागरूक भी करेंगे।यात्रा का मुख्य उद्देश्य: देव-चित्रों का अपमान रोकनायात्रा की शुरुआत करते हुए कृष्णेंदु और बिप्लब ने बताया कि बाजार में बिकने वाले कई पैकेट बंद उत्पादों, विशेषकर गुटखा, बीड़ी और अन्य नशीले पदार्थों के रैपर व पैकेटों पर हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें छपी होती हैं। लोग इन उत्पादों का इस्तेमाल करने के बाद उन पैकेटों को सड़कों, नालियों और कचरे के डिब्बों में जहाँ-तहाँ फेंक देते हैं।
युवाओं का संदेश:”सनातन धर्म में जिन देवी-देवताओं की हम श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं, उनकी तस्वीरों का इस तरह पैरों के नीचे आना और कचरे में फेंका जाना बेहद दुखद और अपमानजनक है। व्यावसायिक लाभ के लिए आस्था के इस खिलवाड़ और अमर्यादा को रोकने के प्रति लोगों व कंपनियों को जागरूक करने के लिए ही हमने केदारनाथ तक साइकिल यात्रा का संकल्प लिया है।”इन दोनों युवाओं की इस अनूठी और साहसिक पहल की स्थानीय लोगों द्वारा काफी सराहना की जा रही है और लोग उनकी सुरक्षित व सफल यात्रा की कामना कर रहे हैं।
