जब असम के युवाओं ने अपनी आवाज़ को विचारों में बदला

असम में युवाओं को अपनी बात कहने, सवाल उठाने और अपने विचारों को तर्क के साथ रखने का अवसर देने वाली पहल ‘स्वदेश स्वाभिमान’ ने अब अपनी 25वीं कड़ी पूरी कर ली है। असम साहित्य सभा के अध्यक्ष के रूप में कुलधर सैकिया के कार्यकाल में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य केवल सार्वजनिक भाषण का अभ्यास कराना नहीं, बल्कि युवाओं में अध्ययन, विचार और संवाद की संस्कृति विकसित करना था। ‘असम कथा गोठ’ से जुड़े युवा प्रतिभागी अपनी पसंद के विषयों पर शोध करते हैं, पांच मिनट में अपने विचार प्रस्तुत करते हैं और फिर सवालों का सामना करते हैं। इतिहास, साहित्य, भाषा, संस्कृति, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समकालीन समाज जैसे विविध विषयों ने इस मंच को असम की बदलती युवा सोच का आईना बनाया है। पहल का विस्तार असम से बाहर शिलांग और नई दिल्ली तक हुआ है। इसकी खासियत यह भी है कि युवा केवल वक्ता नहीं, बल्कि आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी भी संभालते हैं, जिससे उनमें नेतृत्व, सहयोग और लोकतांत्रिक भागीदारी की भावना विकसित होती है। 1 अगस्त को गुवाहाटी के संगीताताचार्य लक्ष्मीराम बरुआ सदन में 25वीं कड़ी का आयोजन हुआ और इस अवसर पर ‘स्वदेश स्वाभिमान’ नामक स्मारिका भी प्रकाशित की गई। इसकी असली उपलब्धि मंचों की संख्या नहीं, बल्कि उन युवाओं में पैदा हुआ आत्मविश्वास, जिज्ञासा और सवाल करने का साहस है।

By nanika