दीघा जगन्नाथ मंदिर विवाद पर बड़ा फैसला ओडिशा सरकार के अनुरोध पर पश्चिम बंगाल सरकार ने हटाया ‘धाम’ शब्द, अब कहलाएगा सांस्कृतिक केंद्र 

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के दीघा में नवनिर्मित श्री श्री जगन्नाथ देव मंदिर के नाम से ‘धाम’ शब्द को हटाने का एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। यह कदम पड़ोसी राज्य ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को लिखे गए एक आधिकारिक पत्र और अनुरोध के बाद उठाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि मंदिर के नाम के साथ ‘धाम’ शब्द जोड़ना धार्मिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से पूरी तरह उपयुक्त नहीं था और इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार की ओर से की गई गलती को अब सुधार लिया गया है। इस फैसले के बाद, अब इस धार्मिक स्थल को ‘दीघा जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र’ रूप में जाना जाएगा। 


उल्लेखनीय है कि लगभग दो सौ पचास करोड़ रुपये की लागत से बने इस भव्य मंदिर का उद्घाटन पिछले वर्ष अप्रैल दो हजार पच्चीस में किया गया था, जिसे पुरी के ऐतिहासिक बारहवीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर डिजाइन किया गया है। उद्घाटन के समय से ही इसके नाम के साथ ‘जगन्नाथ धाम’ शब्द जोड़े जाने पर ओडिशा के धार्मिक संगठनों, पुजारियों और पुरी मंदिर के मुख्य सेवादारों (दैतापति) द्वारा तीखा विरोध दर्ज कराया जा रहा था। उनका तर्क था कि सनातन संस्कृति और हिंदू परंपराओं के अनुसार केवल पुरी ही वास्तविक ‘चार धामों’ में से एक है, और किसी नए मंदिर के लिए ‘धाम’ शब्द का प्रयोग करना उसकी पवित्रता और परंपराओं के खिलाफ है। मुख्यमंत्री अधिकारी ने यह भी आश्वस्त किया है कि नाम में बदलाव के बावजूद दीघा के इस मंदिर में पुरी के श्रीमंदिर की तरह ही सभी दैनिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और रीतियों का पूरी श्रद्धा व निष्ठा के साथ पालन किया जाएगा।

By rohan