भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच टाटा ट्रस्ट्स ने डिमेंशिया की शुरुआती पहचान का किया आह्वान

टाटा ट्रस्ट्स ने बुधवार को ‘वजूद रहे मौजूद’ नामक एक जन स्वास्थ्य जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसमें डिमेंशिया की शुरुआती पहचान व निदान और मरीजों व देखभाल करने वालों के लिए मजबूत सहायता प्रणाली का आह्वान किया गया है। विश्व अल्जाइमर माह के दौरान जारी यह अभियान, भारत की बुजुर्ग आबादी के विस्तार के साथ डिमेंशिया को एक उभरती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में रेखांकित करता है।

वर्ष 2050 तक भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या 34.7 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। वर्तमान में लगभग 88 लाख बुजुर्ग भारतीय डिमेंशिया के साथ जी रहे हैं, जबकि अध्ययनों से संकेत मिलता है कि लगभग 90% मामलों में इसका निदान ही नहीं हो पाता। एम्स-यूएससी के 2023 के एक अध्ययन के अनुसार 2036 तक यह संख्या 1.69 करोड़ तक पहुंच सकती है।

इस अभियान फिल्म में मनोचिकित्सक, न्यूरोलॉजिस्ट, जेरियाट्रिशियन, देखभाल करने वाले और शुरुआती चरण के डिमेंशिया से पीड़ित लोग शामिल हैं, जो इस बात पर जोर देते हैं कि याददाश्त, व्यवहार और दैनिक कामकाज में बदलाव को केवल बढ़ती उम्र का असर नहीं मान लेना चाहिए।

टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि डिमेंशिया अगले तीन दशकों में एक प्रमुख स्वास्थ्य विमर्श बन जाएगा, जिसके लिए साक्ष्य-आधारित देखभाल प्रणाली की आवश्यकता है। ट्रस्ट्स ‘टाटा लोंगिट्यूडिनल स्टडी ऑन एजिंग’ और ‘डिमेंशिया इंडिया अलायंस’ सहित कई पहलों का भी समर्थन कर रहा है।
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब कोलकाता की वृद्ध होती आबादी संगठित जेरियाट्रिक और दीर्घकालिक देखभाल की मांग को बढ़ा रही है। शहर में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्रशिक्षित नर्सिंग पेशेवरों की कमी का भी सामना कर रहा है, जो विशेष डिमेंशिया-देखभाल बुनियादी ढांचे और कुशल देखभालकर्ताओं की आवश्यकता को उजागर करता है।

By Business Bureau