Tata Sons की नई चुनौती: लिस्टिंग और चंद्रशेखरन के कार्यकाल पर मतभेद

Tata Sons में नेतृत्व और स्वामित्व ढांचे को लेकर नई बोर्डरूम खींचतान सामने आई है। 17 सितंबर को करीब तीन घंटे चली बोर्ड बैठक में कंपनी ने दो अहम फैसले किए—भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया निर्देश के बाद शेयर बाजार में लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने और एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने का निर्णय। दोनों फैसलों का Tata Trusts के चेयरमैन और Tata Sons के नामित निदेशक नोएल टाटा ने विरोध किया। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के पक्ष में 4:1 से मतदान हुआ। यह फैसला चंद्रशेखरन के अगस्त में लिए गए रुख से बदलाव है, जब उन्होंने 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने वाले अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद पद पर बने रहने की इच्छा नहीं जताई थी। 17 सितंबर की बैठक में बोर्ड ने उन्हें पुनर्विचार के लिए कहा, जिसके बाद उन्होंने नए कार्यकाल पर सहमति जताई। इसी बैठक में Tata Sons ने लिस्टिंग की दिशा में प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया और RBI, Tata Trusts तथा अन्य संबंधित पक्षों से मार्गदर्शन लेने की बात कही। यह घटनाक्रम RBI द्वारा 11 सितंबर को Tata Sons की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में पंजीकरण स्वेच्छा से वापस करने की अर्जी खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद हुआ। इससे Tata Sons के लिए ऊपरी स्तर की NBFC पर लागू लिस्टिंग संबंधी नियामकीय आवश्यकता से बचने का प्रस्तावित रास्ता बंद हो गया और कंपनी के सामने अब लिस्टिंग से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की चुनौती है।

By nanika