भारत सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। नए मसौदे के अनुसार, जो श्रमिक साल में कम से कम 90 दिनों तक काम करेंगे, वे ही सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले सामाजिक सुरक्षा लाभों के पात्र होंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन लाखों अस्थाई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े श्रमिकों को एक सुरक्षा कवच प्रदान करना है, जो वर्तमान में स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना लाभ और पेंशन जैसी सुविधाओं से वंचित हैं।
इस योजना के कार्यान्वयन के लिए एक केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा, जहाँ श्रमिकों को अपनी कार्य अवधि का विवरण देना होगा। सरकार इन सुविधाओं के लिए धन जुटाने हेतु एग्रीगेटर कंपनियों (जैसे स्विगी, ज़ोमैटो और ओला) पर उनके टर्नओवर का कुछ प्रतिशत उपकर (सेस) लगाने पर भी विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के असंगठित क्षेत्र के कार्यबल के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा, जिससे उन्हें भविष्य में वित्तीय स्थिरता और चिकित्सा सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
