भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने १९ मई २०२६ को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग ९० पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। पिछले पाँच दिनों के भीतर ईंधन की दरों में यह दूसरी बड़ी वृद्धि है। इससे पहले १५ मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में ३ रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था, जिसने लगभग चार साल से चले आ रहे मूल्य फ्रीज (स्थिरता) को समाप्त कर दिया था। इस नए संशोधन के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ८७ पैसे बढ़कर ९८.६४ रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत ९१ पैसे बढ़कर ९१.५८ रुपये प्रति लीटर हो गई है। देश के विभिन्न राज्यों में वैट की दरों में अंतर होने के कारण स्थानीय कीमतें अलग-अलग हैं, जिसमें कोलकाता में पेट्रोल की कीमत ९६ पैसे बढ़कर १०९.७० रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत ९४ पैसे बढ़कर ९६.०७ रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है।
ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही इस वृद्धि का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष है। २८ फरवरी २०२६ को ईरान पर हुए हमलों और उसके बाद जवाबी कार्रवाइयों के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। इस संकट की वजह से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ५० प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं। भारत का कच्चा तेल आयात बास्केट जो फरवरी में औसतन ६९ डॉलर प्रति बैरल था, वह अब बढ़कर ११३ से ११४ डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के इस बड़े झटके के कारण तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय नुकसान को कम करने के लिए खुदरा कीमतों में यह बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही सीएनजी की कीमतों में भी पिछले कुछ दिनों में कुल ३ रुपये प्रति किलोग्राम तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ और बढ़ गया है।
