नागालैंड के चुमौकेदिमा, दीमापुर और मोकोकचुंग जिलों में गोरखा समुदाय ने साहित्यिक गौरव और सांस्कृतिक एकता के साथ 212वीं भानु जयंती मनाई। यह आयोजन नेपाली भाषा के महान कवि और आदिकवि भानुभक्त आचार्य की साहित्यिक विरासत को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया।
चुमौकेदिमा में गोरखा स्टूडेंट्स यूनियन चुमौकेदिमा डिस्ट्रिक्ट (GSUCD) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समुदाय के लोगों, छात्रों, युवाओं, महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। समारोह में भानुभक्त आचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में पारंपरिक नृत्य, कविता पाठ, खुकरी नृत्य और संगीत कार्यक्रम शामिल रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने नेपाली भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर हाल ही में हुई नाबालिग पीड़िता से जुड़ी घटना के विरोध में एकजुटता सभा भी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों की सुरक्षा और न्याय की मांग की गई।
दीमापुर में गोरखा यूनियन और गोरखा स्टूडेंट्स यूनियन द्वारा आयोजित समारोह में भानुभक्त आचार्य के जीवन और योगदान को याद किया गया। इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले गोरखा समुदाय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
मोकोकचुंग में आयोजित समारोह में अधिकारियों और समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाषा और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि भानुभक्त आचार्य द्वारा नेपाली में रामायण का अनुवाद साहित्य को आम लोगों तक पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य था। समारोहों ने गोरखा समुदाय की सांस्कृतिक पहचान, एकता और साहित्यिक परंपरा को मजबूत करने का संदेश दिया।
