एसआईआर से नाम कटने के डर के बीच प्रवासी मजदूरों की भारी वापसी मतदान को पहचान का प्रमाण मान रहे श्रमिक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के पहले चरण के मतदान के लिए अन्य राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों का हुजूम उमड़ पड़ा है। संतरागाछी, शालीमार, हावड़ा और सियालदह जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर चेन्नई, केरल और अन्य क्षेत्रों से आने वाली ट्रेनें खचाखच भरी हुई पहुँच रही हैं। इस बार मतदान केवल एक नागरिक कर्तव्य नहीं, बल्कि अपनी भारतीय पहचान साबित करने का जरिया बन गया है। ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया के कारण लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की खबरों ने इन मजदूरों के बीच गहरी असुरक्षा पैदा कर दी है। कई श्रमिकों का मानना है कि यदि वे इस बार वोट देने नहीं आए, तो उन्हें भी “अवैध घुसपैठिया” मानकर सूची से बाहर कर दिया जाएगा।

मालदा, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों से सबसे अधिक पलायन होता है और रिपोर्टों के अनुसार इन्हीं क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम कटने की दर भी सबसे अधिक है। कई मजदूरों ने शिकायत की है कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम अचानक सूची से गायब हो गए हैं, जबकि वे पीढ़ियों से यहीं रह रहे हैं। प्रवासी मजदूर एकता मंच के अनुसार, पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा में कुछ मजदूरों को वोट देने के लिए घर लौटने से रोकने की कोशिशें भी की गईं। इन मजदूरों के लिए मतदान करना “दूसरे दर्जे का नागरिक” बनने के डर के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरोध और अपनी संवैधानिक वैधता को पुनः प्राप्त करने का संघर्ष है।

By rohan