ममता बनेर्जी सरकारी कामकाज की प्रगति जांचने के लिए लांच करेगी नया ऐप

अधिकारी अब कार्यालय के ठंडे कमरे में बैठकर सरकारी कामकाज की प्रगति की रिपोर्ट नहीं दे सकेंगे। उन्हें खुद मैदान में जाना होगा। राज्य सरकार फांकीबाजी को पकडऩे के लिए एक नया ऐप ला रही है। इस संबंध में वित्त विभाग ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। नवान्न ने उस अधिसूचना के आधार पर पहले ही एक हेल्प डेस्क बना लिया है। यह डेस्क जिलों के ब्लॉक और उप-मंडल स्तर से राज्य सरकार को आने वाली सूचनाओं की निगरानी (निगरानी) करेगी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों द्वारा कार्य निरीक्षण की प्रक्रिया में स्वचालित जियो-टैगिंग होगी। जिससे साफ है कि अधिकारियों के घर बैठकर रिपोर्ट देने के दिन अब खत्म होने वाले हैं। नवान्न अधिकारियों के एक वर्ग के अनुसार, ब्लॉक, उप-मंडल और यहां तक कि जिला प्रशासनिक स्तर पर भी कुछ अधिकारी हैं, जो स्वयं कार्य की प्रगति से अवगत नहीं हैं। नतीजतन सरकार को भी पता नहीं चल पाता कि काम कितना आगे बढ़ा है। परिणामस्वरूप, बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कार्य लंबे समय से चल रहे हैं। सरकार के शीर्ष स्तर का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर देखभाल की कमी के कारण सरकारी काम शुरू तो होते हैं लेकिन देर से पूरे होते हैं। नवान्न उसे रोकना चाहता है।
कई अधिकारी दूसरी वजह की भी बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक, सत्ताधारी दल के एक वर्ग का मानना है कि सरकारी कामकाज में नौकरशाहों की सुस्ती के कारण फॉलोअप प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पा रही है। इससे लोगों को समय पर सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। राजनीतिक तौर पर इसका नकारात्मक असर सत्ता पक्ष पर पड़ रहा है। तृणमूल का यह हिस्सा सोचता है कि नौकरशाह वोट नहीं देते। वोट करती है पार्टी। लेकिन पार्टी के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को अपने काम का जवाब देना पड़ता है। प्रशासनिक हलके के कई लोगों के मुताबिक राज्य सरकार इस बात को स्वीकार कर ऐप बनाने की राह पर चल रही है।
वित्त विभाग के दिशानिर्देशों के साथ, नवान्न ने अधिकारियों को 22 पेज की प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश भी भेजा। मोबाइल स्क्रीन इमेज के जरिए लिखावट के साथ समझाया गया है कि क्या प्रक्रिया करनी है। बीडीओ, एसडीओ, जिलाधिकारी से लेकर हर कार्यालय के अधिकारी का मोबाइल नंबर एप में रजिस्टर्ड होना चाहिए। वे ऐप में जो रिपोर्ट भरेंगे उसकी पुष्टि छह अंकों के ओटीपी के जरिए करनी होगी। जिस प्रकार किसी भी कार्य के शुरू होने से पहले सर्वेक्षण रिपोर्ट भेजनी चाहिए, उसी प्रकार सरकार को कार्य शुरू होने के बाद निश्चित अंतराल पर उसका निरीक्षण कर रिपोर्ट देनी पड़ेगी। अधिकारियों को किए जा रहे काम की तस्वीरें खींचकर अपलोड करनी होंगी।
दरअसल, सरकार अब अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट नहीं मांगेगी। अधिकारियों को सक्रिय होकर ऐसा करना होगा। सब कुछ डिजिटल तरीके से होगा। मान लीजिए, एक सड़क निर्माणाधीन है। अधिकारी समय-समय पर रिपोर्ट देंगे कि कोई समस्या है या नहीं। यदि ऐसा है तो यह कैसा है? सरल या जटिल समस्या? इसी तरह बिजली, सफाई, पेयजल समेत जन जीवन की रोजमर्रा की समस्याएं भी हैं। ऐप में विभागवार क्षेत्र अलग-अलग होंगे। अधिकारी उसी हिसाब से जानकारी देंगे।
पिछले कुछ वर्षों में सरकारी कामकाज में निगरानी की कमी को लेकर मुख्यमंत्री कई प्रशासनिक बैठकों में अपना गुस्सा जाहिर कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री ममता का गुस्सा छिपा नहीं रहा कि जब काम शुरू हुआ तो उसे बीच में ही रोक दिया गया और सरकार को इसकी जानकारी नहीं दी गयी। प्रशासनिक हलके के कई लोगों के मुताबिक, बार-बार कहे जाने के बावजूद नवान्न एक खास समूह के अधिकारियों और नौकरशाहों को सीधा नहीं कर पा रहे थे। नवान्न इस बार डिजिटल तरीके से केंद्रीय निगरानी की प्रक्रिया शुरू करना चाहता हैं। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि विभिन्न खाद्य निर्माण कंपनियों, दवा कंपनियों, सौंदर्य प्रसाधन या विभिन्न उत्पाद कंपनियों के विपणन विभागों के पास संबंधित कंपनियों के कर्मचारियों के लिए ऐप हैं। ताकि वे घर बैठे मार्केट रोटेशन की रिपोर्ट न कर सकें। जियो टैगिंग का भी प्रावधान है। राज्य सरकार इसी तरह सरकारी कामकाज की मॉनिटरिंग की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।

By Arbind Manjhi