भागलपुर में फर्जी शिक्षिका के नाम पर लाखों का भुगतान:छह नामजद पर FIR, हिरासत में कंप्यूटर ऑपरेटर;

भागलपुर शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ‘तनुश्री’ नाम की शिक्षिका का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन स्कूल में नहीं। आरोप है, फर्जी आईडी बनाकर एचआरएमएस पोर्टल पर पहचान आईडी बनी। इसके बाद सरकारी खजाने से वेतन और एरियर के नाम पर लाखों का भुगतान हुआ। इस मामले में जोगसर थाने में छह लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई। पुलिस ने संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को हिरासत में लिया है। डीपीओ शशि चंद चौधरी से भी पूछताछ जारी। इस घटना से शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन में हलचल है।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, ‘तनुश्री’ के नाम से फर्जी पहचान बनी, एचआरएमएस पोर्टल पर रिकॉर्ड भी है। इसी आधार पर वेतन भुगतान शुरू हुआ। इसमें फर्जी पीआरएएन नंबर और बैंक खाते के इस्तेमाल की आशंका है।
सवाल है, बिना जांच के वेतन भुगतान कैसे हुआ? दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं हुई? क्या भुगतान मंजूर करने वाले अधिकारियों से गलती हुई या सरकारी भुगतान प्रणाली की कमियों का फायदा उठाकर फर्जीवाड़ा किया गया? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। इस मामले में सामने आ रहे वित्तीय आंकड़ों ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। उपलब्ध जानकारियों में मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपए की कथित निकासी का जिक्र है। वहीं, दूसरी ओर अगस्त 2026 में एक खाते में लगभग 43 से 46 लाख रुपए के बड़े ट्रांजेक्शन और कुल वित्तीय अनियमितता की राशि करीब 96 से 98 लाख रुपए तक होने की बातें सामने आई हैं।
इसके अलावा, करीब 73 लाख रुपए के एक कथित ट्रांसफर प्रयास को बैंक द्वारा रोके जाने का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग विवरणों में रकम और लेनदेन की तारीखों को लेकर अंतर है। इसलिए वास्तविक निकासी, भुगतान के प्रयास और कुल संदिग्ध राशि का सही आंकड़ा बैंक स्टेटमेंट, विभागीय रिकॉर्ड और पुलिस जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा। मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, एक खाते में बड़ी रकम पहुंचने के बाद बैंक की ओर से उसे फ्रीज किए जाने की बात सामने आई है। कथित तौर पर एक और बड़े ट्रांसफर प्रयास को भी रोकने का दावा किया गया है।
अब जांच का अहम पहलू यह है कि संदिग्ध खाते में पहुंची राशि कहां गई? क्या रकम दूसरे खातों में भी भेजी गई? खाते का संचालन कौन कर रहा था? और इस पूरे लेनदेन में किन लोगों की भूमिका थी? जांचकर्ताओं के सामने अब बैंकिंग लेनदेन, एचआरएमएस पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन विवरण, भुगतान की मंजूरी और संबंधित दस्तावेजों की कड़ियां जोड़ने की चुनौती है। वहीं, इस संबंध में भागलपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है, अब पुलिस अनुसंधान का विषय है। एक ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध है। एक शिक्षिका के नाम से फर्जी आईडी बनाकर भुगतान किया गया है। वेतन के नाम पर अवैध निकासी हुई है। मई 2025 से वेतन भुगतान किया जा रहा था। प्राथमिकि में 6 लोगों का नाम है।
भागलपुर डीडीसी रवि कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। ‘तनुश्री’ नाम की शिक्षिका जिसका एचआरएमएस पर आईडी क्रिएट करके 2025 से उसको वेतन दिया जा रहा था।
जो भी ट्रांजैक्शन हुआ है उसकी जांच की जा रही है। समिति शिक्षा कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों और एचआरएमएस डाटा की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, एसडीपीओ हेमंत सिंह ने बताया कि FIR दर्ज हो गई है, जिनका नाम है उससे पूछताछ की जाएगी। पूछताछ में जो भी बातें सामने आएगी, उस पर जांच की जाएगी। करीब 98 लाख के ट्रांजैक्शन का मामला है। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता, उप विकास आयुक्त रवि प्रकाश और एसडीपीओ हेमंत सिंह के बयानों से भी मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। विभागीय जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित फर्जी आईडी किस स्तर पर तैयार हुई, वेतन भुगतान के लिए किसने अभिलेखों का सत्यापन किया और भुगतान की मंजूरी की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था। जोगसर थाने में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि कथित फर्जीवाड़े को किस तरह अंजाम दिया गया। सरकारी राशि के लेनदेन में किसकी क्या भूमिका रही।
संविदा कर्मी अविनाश राज को हिरासत में लिए जाने और डीपीओ शशि चंद चौधरी से पूछताछ की खबरों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेज क्या खुलासा करते हैं। किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

By Paromita