भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हाल में रेपो रेट बढ़ाने से होम लोन की ईएमआई फिर चर्चा में आ गई है। रेपो रेट 25 बेसिक अंक बढ़ाकर 5.50% किया गया है। साथ ही आरबीआई ने अपना नीतिगत रुख बदलकर “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” (नपी-तुली सख्ती) कर दिया है, जो रेट साइकिल के पलटने का संकेत है।
बढ़ती दरों पर ज्यादातर चर्चा ईएमआई बढ़ने को लेकर होती है। पर एक और चुनौती है, जिसे लोन लेने वाले कई लोग नजरअंदाज कर देते हैं: दरें बढ़ने का लोन की अवधि और कुल लागत पर असर।
अधिकतर खरीदारों के लिए घर खरीदना जिंदगी की सबसे बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी होती है। डाउन पेमेंट के अलावा उन्हें स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, इंटीरियर, फर्निशिंग और सामान शिफ्ट करने जैसे खर्च भी उठाने पड़ते हैं। इसलिए घर खरीदने के बाद के शुरुआती कुछ साल अक्सर आर्थिक रूप से सबसे मुश्किल सालों में गिने जाते हैं।
फिर भी लोन लेने वाले कई लोग फ्लोटिंग रेट होम लोन चुनते आ रहे हैं, क्योंकि लोन मंजूर होते समय ये थोड़े सस्ते लगते हैं।
ब्याज दरें बढ़ने पर फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वालों के सामने आम तौर पर दो रास्ते होते हैं:
बढ़ी हुई ईएमआई चुकाकर यह बोझ उठाना, या
ईएमआई पहले जितनी रखना और लोन की अवधि बढ़ने देना, जिससे समय के साथ लोन की कुल लागत बढ़ जाती है।
ताजा बढ़ोतरी के बाद भी रेपो रेट पिछले रेट साइकिल में देखे गए 6.50% के स्तर से 100 बेसिक अंक नीचे है। इससे पता चलता है कि लंबी अवधि के होम लोन के दौरान ब्याज दरों में कितने बड़े बदलाव आ सकते हैं।
आर्थिक रूप से सबसे नाजुक सालों में सुरक्षा
बढ़ती दरों के इस माहौल में घर खरीदारों की दिलचस्पी ऐसे विकल्पों में बढ़ रही है, जिनसे हर महीने की किस्त को लेकर ज्यादा निश्चितता मिले।
कोटक महिंद्रा बैंक हाइब्रिड होम लोन में पात्र ग्राहक अपने होम लोन की ब्याज दर 39, 52 या 65 महीनों के लिए लॉक कर सकते हैं। इसकी दर बैंक के फ्लोटिंग रेट होम लोन के लगभग बराबर रखी गई है और हाइब्रिड ढांचा चुनने के लिए कोई अलग प्रीमियम नहीं लिया जाता। चुनी गई अवधि में रेपो रेट बढ़ने पर भी ब्याज दर और ईएमआई दोनों नहीं बदलतीं। फिक्स्ड अवधि खत्म होने के बाद लोन फ्लोटिंग रेट में बदल जाता है। यह दर रेपो रेट में वह स्प्रेड जोड़कर तय होती है, जो लोन मंजूरी के समय पहले से बता दिया जाता है।
बढ़ती ब्याज दरों के बीच नए घर खरीदारों के सामने एक छिपा जोखिम: लोन की लंबी अवधि और कर्ज की बढ़ती लागत
