अमिताभ बच्चन के पॉपुलर क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ में पहुंचे राजस्थान के एक कंटेस्टेंट की कहानी इन दिनों चर्चा में है। यह कहानी है किशन लाल कुमावत की, जो पेशे से मिस्त्री हैं और लोगों के घरों में टाइलें लगाने का काम करते हैं। अपनी मेहनत, हौसले और ज्ञान के दम पर किशन ने न सिर्फ KBC की हॉटसीट तक का सफर तय किया, बल्कि अपने खेल और बातों से अमिताभ बच्चन समेत शो में मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।
31 अगस्त के एपिसोड में किशन लाल कुमावत हॉटसीट पर पहुंचे। साधारण पेशे से आने वाले किशन ने जिस आत्मविश्वास के साथ गेम खेला, उसने सभी को हैरान कर दिया। उनकी खास बात यह रही कि उन्होंने बिना किसी लाइफलाइन का इस्तेमाल किए इस मुकाम तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की।
शो के दौरान अमिताभ बच्चन ने जब किशन से उनके काम के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वह लोगों के घरों में टाइलें लगाने का काम करते हैं। बातचीत आगे बढ़ी तो किशन ने अपने काम के दौरान मिलने वाले व्यवहार और भेदभाव को लेकर भी खुलकर बात की।
किशन ने बताया कि कई बार जिन घरों में वह काम करने जाते हैं, वहां लोग उन्हें खाना और पानी तक देने से मना कर देते हैं। उनके साथ अलग तरह का व्यवहार किया जाता है। उन्होंने अपनी कंस्ट्रक्शन साइट का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां इंजीनियर और आर्किटेक्ट से चाय-कॉफी के लिए पूछा जाता है और उन्हें सम्मान दिया जाता है, लेकिन मजदूरों से कोई पूछने वाला तक नहीं होता।
किशन की बातों में समाज में मेहनतकश लोगों को लेकर बनी सोच पर भी सवाल दिखाई दिया। उन्होंने बताया कि अक्सर किसी मिस्त्री या मजदूर को देखकर लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि उसके पास पढ़ाई-लिखाई नहीं है, इसलिए वह यह काम कर रहा है। लेकिन किशन ने इस सोच पर सवाल खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास डिग्री और पढ़ाई है, उन्हें समाज में सम्मान मिलता है, जबकि मजदूरों को उसी तरह का सम्मान नहीं दिया जाता। उनका सवाल था कि अगर दोनों अपने-अपने काम में मेहनत कर रहे हैं, तो आखिर उनके बीच फर्क क्या है?
किशन की यह बात सुनकर शो का माहौल भावुक हो गया। उनकी कहानी ने सिर्फ उनके संघर्ष को सामने नहीं रखा, बल्कि समाज में मजदूरों और मेहनतकश लोगों के साथ होने वाले व्यवहार पर भी एक अहम सवाल खड़ा किया। KBC 18 की हॉटसीट पर पहुंचकर किशन ने अपने ज्ञान और आत्मविश्वास से यह साबित किया कि किसी व्यक्ति की काबिलियत को उसके पेशे से नहीं आंका जाना चाहिए।
