भारत सरकार देश में रोजगार की स्थिति का अधिक सटीक आकलन करने के लिए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में बदलाव करने की योजना बना रही है। सांख्यिकी मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, सर्वेक्षण में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स के लिए एक अलग श्रेणी शामिल की जाएगी। इसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अधिक परिवारों से पूछा जाएगा कि क्या उनके सदस्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करते हैं। सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 तक पिछले पांच वर्षों में गिग वर्कर्स की संख्या में 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अनुमान है कि देश के कुल कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी लगभग 2 प्रतिशत हो सकती है।
नए सर्वेक्षण में बिना वेतन किए जाने वाले कामों को भी दर्ज किया जाएगा। इनमें घरेलू उपयोग के लिए वस्तुओं का उत्पादन, घर के कामकाज, बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल, स्वयंसेवी गतिविधियां और बिना वेतन प्रशिक्षण शामिल हैं। श्रम अर्थशास्त्री के. आर. श्याम सुंदर ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स की गणना करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इससे उन अनौपचारिक श्रमिकों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाएगी जो किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने बिना वेतन वाले कामों को सर्वेक्षण में शामिल करने को महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि इससे भविष्य में राष्ट्रीय आय की गणना की पद्धति में भी बदलाव हो सकता है। प्रस्तावित संशोधन जनवरी 2027 से लागू होने की योजना है और सरकार ने इस पर विशेषज्ञों तथा आम जनता से 15 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।
