भारत में दिवाली, दुनिया में दिवाला: आखिर क्यों बेअसर रहा ग्लोबल मार्केट का भूचाल

भारी बिकवाली के बीच शुक्रवार सुबह घरेलू बाजार गिरावट के साथ खुले, लेकिन अमेरिका समेत दुनियाभर के बाजारों में मचे भूचाल के बावजूद जो आशंका जताई जा रही थी, उसका उतना असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा, जहाँ दुनिया भर के बाजारों का बुरा हाल रहा, वहीं भारतीय शेयर बाजार में स्थिति काफी हद तक संभली हुई नजर आई। इससे पहले शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 0.37 प्रतिशत यानी लगभग 300 अंक गिरकर 79,016.05 पर आ गया था, जबकि निफ्टी 0.60 प्रतिशत यानी 148.55 अंक गिरकर 24,388.05 पर पहुंच गया था, हालांकि कुछ ही मिनटों में बाजार हरे निशान में भी कारोबार करता दिखा। इस बीच आईटी शेयरों ने चौंकाया और इसके स्‍टॉक्‍स 2 फीसदी तक चढ़ गए, जबकि अमेरिका समेत अन्‍य प्रमुख बाजारों में आईटी शेयरों का सबसे बुरा हाल देखा गया था, वहीं भारतीय बाजार में इसके उलट निफ्टी आईटी में लगभग 2 प्रतिशत की तेजी आई और 30 शेयरों वाले सेंसेक्‍स पैक के इन्‍फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस व टेक महिंद्रा के शेयरों में 2 फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा निफ्टी मिड-स्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम, प्राइवेट बैंक और मीडिया सेक्टर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखे, हालांकि सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी मेटल में सबसे ज्यादा 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके बाद निफ्टी रियल्टी में 1.56 प्रतिशत तथा निफ्टी केमिकल्स, ऑयल एंड गैस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी और ऑटो में 1.34 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। भारत पर इस गिरावट का सबसे कम असर क्यों पड़ा, इस पर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी बाजारों की भारी बिकवाली का असर अन्य बाजारों पर भले पड़ा हो, लेकिन भारत पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़ने की संभावना है क्योंकि नैस्डैक में 5.6 प्रतिशत की गिरावट मुख्य रूप से डेटा सेंटर पर होने वाले खर्च में बड़ी कमी की चिंताओं के कारण आई है और टेक सेक्टर की इस गिरावट, विशेषकर एआई से जुड़े कारोबार में सुस्ती, भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले पांच कारोबारी दिनों में 35,781 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और गुरुवार को लगातार पांचवें सत्र में 14,974 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 10,444 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। बाजार विश्леषकों के अनुसार इस तेजी को उम्मीद से बेहतर कमाई का समर्थन मिल रहा है और लार्ज-कैप शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन के कारण भी बाजार को बल मिला है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 100.31 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 1 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 91.91 डॉलर प्रति बैरल हो गई। उल्लेखनीय है कि वैश्विक बाजारों में इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली रही, जिसके चलते अमेरिका में गुरुवार को नैस्डैक कंपोजिट 5.52 प्रतिशत गिर गया जो 19 महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है, और टेक शेयर बेस्‍ड नैस्डैक-100 में 6.3 प्रतिशत की भारी गिरावट आने से इसकी बाजार वैल्यू से करीब 2.3 लाख करोड़ डॉलर साफ हो गए।

By sunny