मिजोरम विधानसभा अध्यक्ष लालबियाकजामा ने अपनी आधिकारिक विदेश यात्रा के दौरान ओस्लो स्थित भारतीय दूतावास में नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गांगटे से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रीय एकीकरण और भारत के विविध जातीय समुदायों, विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। यह बैठक दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में लालबियाकजामा की भागीदारी के बाद हुई। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, विदेश यात्रा का आयोजन विदेश मंत्रालय ने किया था और इसमें फ्रांस, स्विट्जरलैंड तथा नॉर्वे का दौरा शामिल था। यात्रा के दौरान संबंधित देशों में भारतीय राजनयिक मिशनों ने प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की और आधिकारिक कार्यक्रमों में सहयोग किया। नॉर्वे में राजदूत गांगटे ने लालबियाकजामा और उनकी पत्नी के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया। इस अवसर पर भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता से जुड़े विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिला। बैठक में राष्ट्रीय एकीकरण और देशभर में रहने वाले विभिन्न जातीय समुदायों पर चर्चा हुई, जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के समुदायों पर विशेष ध्यान दिया गया। पूर्वोत्तर भारत विभिन्न जातीय समूहों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का घर है और ओस्लो में हुई बातचीत में क्षेत्र से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा रहे। मुलाकात के दौरान मिजोरम विधानसभा सचिवालय के अतिरिक्त सचिव ललथांगमाविया भी लालबियाकजामा के साथ थे। ओस्लो में हुई यह मुलाकात दक्षिण अफ्रीका में संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद मिजोरम विधानसभा अध्यक्ष की व्यापक अंतरराष्ट्रीय यात्रा का हिस्सा थी। राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन ने विभिन्न देशों और क्षेत्रों के सांसदों तथा संसदीय प्रतिनिधियों को संसदीय मामलों और संबंधित विषयों पर विचार साझा करने का मंच प्रदान किया। इसके बाद यूरोप में लालबियाकजामा के कार्यक्रमों में फ्रांस, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे में भारतीय राजनयिक मिशनों के सहयोग से आयोजित बैठकें शामिल थीं। इन मुलाकातों के माध्यम से विदेश यात्रा के दौरान भारत और उसके विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर चर्चा के अवसर मिले। राजदूत गांगटे के साथ हुई बैठक में भारत के विविध समुदायों और राष्ट्रीय एकीकरण पर चर्चा में पूर्वोत्तर का दृष्टिकोण भी सामने आया। बैठक में किसी विशेष नीतिगत पहल की घोषणा नहीं की गई, बल्कि देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता तथा पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। ओस्लो बैठक में मिजोरम विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विधायी और प्रशासनिक संदर्भ भी दिया। यह यात्रा आधिकारिक विदेश दौरों के दौरान भारतीय राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय राजनयिक मिशनों की भूमिका को भी रेखांकित करती है। मिजोरम के लिए इस मुलाकात ने राज्य और व्यापक पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का अवसर दिया। लालबियाकजामा की यूरोपीय यात्रा में संसदीय भागीदारी के साथ राजनयिक संवाद भी शामिल रहे। ओस्लो में चर्चा का केंद्र राष्ट्रीय एकीकरण, जातीय विविधता और पूर्वोत्तर क्षेत्र रहा, जबकि व्यापक यात्रा में तीन यूरोपीय देशों में कार्यक्रम शामिल थे। केप टाउन में राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के बाद यह कार्यक्रम अध्यक्ष की आधिकारिक विदेश यात्राओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
ओस्लो बैठक में राष्ट्रीय एकीकरण और पूर्वोत्तर की विविधता पर चर्चा
